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गोल्डन टॉवर-17 फ्लैट की अनुमति थी तो 27 फ्लैट कैसे बने, अब बिल्डिंग की टाइल्स उखड़कर गिर रही है

ग्वालियर. थाटीपुर स्थित गोल्डन टॉवर के पिलर ध्वस्त होने के बाद बिल्डिंग को एक ओर झुके हुए 23 दिन गुजर गये है। बिल्डिंग के सभी 26 फ्लैट खाली करा लिये गये थे। बिल्डर का दावा है कि पिलर सही कराये जा रहे है। मल्टी में ऐसा कुछ नहीं बिगड़ा है, पर हकीकत कहीं ज्यादा खतरनाक है। मंगलवार को गोल्डन टॉवर इतनी जर्जर हो चुकी है कि जरा सी धमक से बिल्डिंग पर लगी टाइल्स उखड़कर नीचे गिर रही है।
एक मंजिल से लेकर 4 मंजिल तक यही हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मल्टी की यह हालत है तो यहां लोगों को रहने के लिये कहना है कि उनकी जान का आफत में डालना है। गोल्डन टॉवर में रहने वाले पीडि़त फ्लैट मालिक जसवीर सिंह का कहना है कि जो दिख रहा है वह बहुत कम है। अन्दर फ्लैट्स में भी यही हालत है किसी भी सूरज मे ंहम यहां नहीं रहेंगे।
17 फ्लैट की थी अनुमति तो 27 कैसे बने
गोल्डन टॉवर में रहने वाले जसवीर सिंह ने बताया है कि कुछ दिन पहले नगरनिगम के असिस्टेंट सिटी प्लानर प्रदीप जादौर निरीक्षण के लिये आये थे। उनसे पता लगा था कि बिल्डर को गोल्डन टॉवर में 17 फ्लैट की अनुमति है। इसके बाद भी 27 फ्लैट कैसे बन गये। अब यहां रहने वाले लोगों को यह भी डर है कि नगर निगम मल्टी ठीक होने के बाद अवैध निर्माण को तोडेंगी।
इस जर्जर मल्टी में नहीं रहेंगे
गोल्डन टॉवर के पीड़ित फ्लैट मालिक जसवीर सिंंह, संदीप सिंह, शशिप्रभा व रंजना वर्मा का कहना है कि यह मल्टी जर्जर हो चुकी है। जरासी धमक से टाइल्स उखड़ रही हैं, तो यहां कैसे रहा जा सकता है। बिल्डर वापस भी जो मरम्मत करा रहा है वह भी घटिया है। वहां रहना अपनी जान को जोखिम में डालना ह।

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