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पेम्प्लेट व पोस्टर की प्रिंट लाईन पर प्रिंटिंग प्रेस का पता प्रदर्शित करना होगा, आदेश का पालन न करने पर 6 माह की सजा का प्रावधान

ग्वालियर – चुनाव प्रचार से संबंधित पेम्प्लेट व पोस्टर इत्यादि प्रचार सामग्री पर प्रिंटिंग प्रेस का नाम एवं मोबाइल व टेलीफोन नम्बर सहित सम्पूर्ण पता प्रिंट  लाईन में प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। जो प्रिटिंग प्रेस ऐसा नहीं करेंगी उन प्रिटिंग प्रेस मालिक के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी। यह बात अपर जिला दण्डाधिकारी टीएन सिंह ने प्रिंटिंग प्रेस संचालकों की बैठक में कही। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का पालन न करने पर प्रिंटिंग प्रेस संचालक को 6 माह की सजा हो सकती है। साथ ही अर्थदण्ड भी भुगतना होगा।
प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को आगाह करते हुए बैठक में जानकारी दी गई कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127-क में स्पष्ट किया गया है कि चुनाव प्रचार संबंधी पर्चे, पोस्टर, बैनर इत्यादि की प्रिंट लाईन में मुद्रक और प्रकाशक के नाम अनिवार्यत: स्पष्ट रूप में दर्शाए जाएं। साथ ही मुद्रित मटेरियल की संख्या भी प्रदर्शित करें। इस प्रकार मुद्रित की गई सामग्री की चार प्रतियां और प्रकाशक के घोषणा पत्र की एक प्रति मुद्रण के 3 दिवस के अंदर जिला निर्वाचन कार्यालय को निर्धारित प्रपत्र में अनिवार्यत: प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि मुद्रित किए गए पेम्प्लेट, बैनर व पोस्टर इत्यादि की संख्या क्या है। किसी अभ्यर्थी के पक्ष में उसका कोई समर्थक यदि पेम्प्लेट, बैनर व पोस्टर इत्यादि प्रकाशित कराना चाहता है तो भी अभ्यर्थी की लिखित में सहमति अनिवार्यत: ली जाए। अगर ऐसा नहीं किया तो संबंधित प्रिंटिंग प्रेस संचालक जवाबदेह होंगे और उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जायेगी।
मंगलवार को यहाँ कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में आयोजित हुई बैठक में कलेक्टर ने सभी प्रिटिंग प्रेस संचालकों से कहा कि वे भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। इसमें कोताही पाई जाने पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी एलके पाण्डेय व प्रदेश स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स एसबी ओझा सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं प्रिंटिंग प्रेस के संचालकगण मौजूद थे।
किसी अभ्यर्थी के पक्ष में उसका कोई समर्थक यदि पेम्प्लेट, बैनर व पोस्टर इत्यादि प्रकाशित कराना चाहता है तो भी अभ्यर्थी की लिखित में सहमति अनिवार्यत: ली जाए। अगर ऐसा नहीं किया तो संबंधित प्रिंटिंग प्रेस संचालक जवाबदेह होंगे और उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जायेगी।

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