MP में ओल्ड पेंशन पर GAD करेगा परीक्षण, मंत्री बोले 22 कर्मचारी संगठनों से 3 दौर की बातचीत
भोपाल. कर्नाटक के बाद अब एक और भाजपा शासित राज्य ओल्ड पेंशन स्कीम यानी (OPS) की ओर बढ रहा है। एमपी में भी OPS पर सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। न्यू पेंशन स्कीम (NPS) वाले प्रदेश के 4 लाख 82 हजार कर्मचारी इस पर एकत्रित होने लगे हैं। शुक्रवार से इस मुद्दे पर सरकारी की ओर से कर्मचारी मामलों को देख रहे सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया से बात की तो उन्होंने कहा है कि अभी तक 22 कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई है।

16 अप्रेल को पूरे देश में 80 लाख कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे
32 राज्यों के 50 लाख और केन्द्र के 30 लाख अधिकारी-कर्मचारी देशभर में ओपीएस लागू करने की मांग को लेकर 16 अप्रैल को एक दिवसीय धरने का आयोजन किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर इस आयोजन को हैण्डल कर रहे विजय बंधु ने बताया है कि मप्र में 22 कर्मचारी संगठनों ने ओपीएस को अपने मांग पत्र में पहले नम्बर पर रखा है। नंशनल मूवमेंट फॉर ओपीएस के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद डेहरिया बोले मंत्री भदौरिया ने हमसे कहा है कि सीएम के सामने अच्छे वकील के रूप में आपकी बात रखूंगा। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा है कि आपका एजेंडा आगे तक लेकर जाऊंगा।
4.82 लाख कर्मचारी एनपीएस वाले, ओपीएस वाले 1.88 लाख
मप्र में 1 जनवरी 2005 अथवा इसके बाद नियुक्त होने वाले सभी शासकीय कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना (एनपीएस) 13 अप्रैल 2005 के आदेश के अनुसार लागू की गई है।प्रदेश में कुल 6 लाख 70 हजार कर्मचारियों में से 4 लाख 82 हजार कर्मचारी एनपीएस के दायरे में हैं, जिनके 21 हजार करोड़ रु. एनपीएस में जमा हो चुके हैं। महज 1 लाख 88 हजार कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें ओपीएस की पात्रता है।
अब पेंशन का पूरा गणित समझ लीजिए
1 जनवरी 2005 के बाद प्रदेश में 3.35 लाख से ज्यादा कर्मचारी सेवा में आ चुके हैं, जो पेंशन नियम-1972 के दायरे में नहीं आते। 2.87 लाख अध्यापक संवर्ग से हैं, जो 2008 में टीचर बन गए। बचे हुए 48 हजार पर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लागू है।1 जनवरी 2005 से सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों का कहना है कि उनके लिए अंशदायी पेंशन (वर्तमान में लागू) में कर्मचारी के मूल वेतन से 10% राशि काटकर पेंशन खाते में जमा कराई जाती है और 14% राशि सरकार मिलाती है। रिटायर होने पर 50% राशि एकमुश्त दे दी जाती है। शेष 50% से पेंशन बनती है। यह राशि अधिकतम 7 हजार रुपए से ज्यादा नहीं होती। इसकी वजह से कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

