वर्तमान में संविधान के सामने स्थिरता बनाम जिम्मेदारी सबसे बड़ी चुनौती- डॉ.आनंद पालीपाल
जेयू के विधि संस्थान में हुआ व्याख्यान का आयोजन
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के विधि संस्थान में आज संविधान एवं नवीन चुनौतियों पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया।शुभारंभ लॉ कमीशन नई दिल्ली के सदस्य डॉ.आनंद पालीवाल एवं डीन ऑफ लॉ विभाग प्रो.संजय कुलश्रेष्ठ ने किया। तत्पश्चात प्रो.संजय कुलश्रेष्ठ ने स्वागत भाषण दिया।व्याख्याता डॉ. आनंद पालीवाल ने संविधान एवं नवीन चुनौतियों पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में संविधान के सामने स्थिरता बनाम जिम्मेदारी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।देश में बार बार चुनाव हो रहे है जबकि 1967 तक एक देश एक चुनाव की प्रक्रिया पूरे देश में अपनाई जाती थी जो वर्तमान में बार बार चुनाव हो रहे है इसका बोझ जनता पर ही पड़ता है।उन्होंने आर्टिकल 19,21, फेडरल स्ट्रक्चर, विधिक सहायता, वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जिसमें हेट स्पीच जो कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने है आदि के बारे में छात्रों का मार्गदर्शन किया।ईश्वर ने मानव को जन्म दिया है उसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी संविधान की है।छात्र स्कालर के रूप में समाज को जगाने का काम भी कर सकते है जो मूलभूत कानून है उनके बारे में आमजन को जानकारी दे सकते है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन ऑफ लॉ विभाग प्रो.संजय कुलश्रेष्ठ ने की।विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ..अंजलि शर्मा, विधि संकायाध्यक्ष गणेश दुबे, डॉ. .रामशंकर सिंह उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन समीक्षा दुबे और आभार व्यक्त डॉ.गणेश दुबे ने किया। इस अवसर पर डॉ.अमित गोपीनाथन, डॉ.वंदना राहुल, डॉ.रंजना कुशवाह, डॉ.नेहा शर्मा, डॉ.श्रद्धा समाधिया, डॉ.चंदना शर्मा, आरएस माहौर, राघवेन्द्र धाकड़, राजवीर तोमर, आशी पाठक, यश जैन, त्रिशांत मिश्रा, रवि तोमर, उत्सव दीक्षित, अनुमीत सिंह उपस्थित थे।

