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नैराेगेज को हेरिटेज ट्रेन के ताैर पर बानमोर तक चलाया जाएगा

सिंधिया रियासत काल की 118 साल पुरानी नैरोगेज ट्रेन ग्वालियर से बानमोर तक लगभग 20 किमी दायरे में हेरिटेज ट्रेन के तौर पर चल सकती है। इस ट्रेन को ग्वालियर, घोसीपुरा, मोतीझील, पुरानी छावनी होते ही बानमोर तक चलाने की योजना है। इस ट्रेन को हेरिटेज ट्रेन के तौर पर चलाने के लिए झांसी मंडल के डीआरएम आशुतोष ने पहली बार प्लेटफार्म नंबर 4 से लेकर नैरोगेज शेड व नैरोगेज का ट्रैक देखा। अब अफसरों को फिजिबिलिटी सर्वे करने के लिए कहा है। पहले रेलवे ने नैरोगेज को हेरिटेज लुक में सिटी ट्रेन के तौर पर 8 किमी दायरे में चलाने की बात कही थी। लेकिन दो साल तक इस पर कोई कवायद नहीं की। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता ने उमरेे के जीएम सतीश कुमार को हाल ही में ज्ञापन सौंपा था।

सिंधिया इस मामले को लेकर रेल मंत्री को पत्र लिख चुके
जीएम ने डीआरएम को निर्देश। डीआरएम ने अफसरों के साथ मिलकर निरीक्षण किया। हेरिटेज सिंधिया संग्रहालय का विस्तार भव्यता के साथ करने की मांग भाजपा नेता सुधीर गुप्ता ने की है। दरअसल, सिंधिया रियासतकाल में नैरोगेज ट्रेन शहर के अंदर चलती थी। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इस मामले को लेकर रेल मंत्री को पत्र लिख चुके हैं। डीआरएम ने भी कहा कि प्लेटफार्म नंबर के पास बनी नैरोगेज लाइन को उखाड़कर प्लेटफार्म नंबर 5 व 6 तैयार किया जाना है। ग्वालियर स्टेशन से नैरोगेज को चलाते हैं तो स्टेशन को री-डेवलपमेंट करने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। डीआरएम ने कंपू स्थित रेलवे के जमीन को देखा। यहां स्मार्ट सिटी ने सड़क का विस्तार करने के लिए मांगा है।

पहले तीन स्टेशनों के बीच चलाने का सर्वे हुआ था
आईआरएसडीसी ने ग्वालियर से मोतीझील तक 8 किमी दायरे में नैरोगेज ट्रेन को हेरिटेज ट्रेन के तौर पर चलाने के लिए मार्च 2021 में सर्वे किया था। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी नैरोगेज ट्रेन को सिटी ट्रेन के तौर पर चलाने का सुझाव स्मार्ट सिटी की बैठक में दे चुके है। ग्वालियर से मोतीझील तक अभी 3 स्टेशन है। ग्वालियर, घोसीपुरा और मोतीझील तक लाइन बिछी हुई है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए गोपाचल पर्वत से लेकर फूलबाग के बीच एक स्टेशन औश्र विकसित करने की योजना रेलवे बनाई थी।

118 साल पुरानी है नैरोगेज
शहर में सिंधिया रियासत काल में नैरोगेज ट्रेन 1905 में शुरू हुई थी। तब ग्वालियर से कंपू कोठी और मुरार के बीच चलती थी। तात्कालीन शासक माधोराव सिंधिया ने लाइट नैरोगेज ट्रेन चलवाई थी। यह लश्कर, मुरार और हजीरा तीनों उपनगरों को ग्वालियर से जोड़ने वाली इस ट्रेन को बाद में श्योपुर तक चलाया गया था। अब 118 साल पुरानी विरासत को बचाने के लिए रेलवे ने फिर से पहल की है।

रेल यार्ड में 38 कोच और 9 इंजन खड़े हैं अभी
ग्वालियर-श्योपुर के बीच 6 नैरोगेज ट्रेन लगभग तीन साल पहले तक चलती थी लेकिन अब ग्वालियर-श्योपुर लाइन को ब्रॉडगेज में परिवर्तन किया जा रहा है। इससे इस ट्रेन का संचालन बंद हो चुका है। अब 189 किमी नैरोगेज ट्रैक को ब्रॉडगेज में परिवर्तन का काम तेजी से चल रहा है जिसे दिसंबर 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी नैरोगेज के 38 कोच और 9 रेल इंजन रेलयार्ड में खड़े जंग खा रहे है।

 

 

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