पूर्व कुलपति की तबियत बिगड़ी तो छात्रों ने छीनी थी जस्टिस की कार, 31 माह सीआईडी ने मानवीय संवेदना का मामला मानकर लगाई खात्मा रिपोर्ट
ग्वालियर. रेलवे स्टेशन परिसर से जस्टिस संजीव एस कालगांवकर की कार चालक से छीनकर ले जाने के प्रकरण में सीआईडी इन्दौर के इंस्पेक्टर अशरफ अली अंसारी ने न्यायालय में खात्मा रिपोर्ट (एफआर) पेश कर दी है। रिपोर्ट के साथ पुलिस और न्यायालयीन अधिकारियों के अभिमत भी संलग्न किये गये है। सीआईडी जांच में सामने आया है कि मामला मानवीय संवेदनाओं का था। हालांकि इस पर अभी न्यायालय की मंजूरी मिलना शेष है।
घटना 11 दिसम्बर 2023 की है इस घटना में छात्र नेता हिमांशु श्रोती और सुकृत शर्मा का गिरफ्तार किया था। उन पर लूट और डकैती आदि की धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। आरोप था कि ट्रेन में रिटायर्ड कुलपति रणजीत सिंह की तबियत हो गयी थी। रेलवे स्टेशन पर एम्बूलेंस नहीं मिलीतो छात्रों ने जस्टिस की कार मांगी थी। चालक ने कार देने से मना कर दिया था तो छात्रों ने जबरन कार लेकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया था।
हाईकोर्ट केस मानवीय संवेदनाओं का मानकर छात्र नेताओं की दी थी जमानत
18 दिसम्बर 2023 का हाईकोर्ट की एकल पीठ ने दोनों छात्रों का जमानत दे दी थी। यह दलील भी दी कि दोनों कानून के छात्र है। उनका मकसद लूट या डकैती का नहीं था, बल्कि मरते हुए इंसान की जान बचाना था। हाईकोर्ट ने भी माना था कि मामला आपराधिक मंशा का नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा था।इसी वजह से शासन या पुलिस पक्ष ने भी इस जमानत का विरोध नहीं किया।
पूर्व सीएम ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा था पत्र
मामले ने तूल पकड़ा और छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन हुए। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर छात्रों के पक्ष में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात कही थी।

