विश्व धरोहर सप्ताह- राष्ट्रीय संरक्षित स्मारकों, प्राचीन धरोहरों को बचाने के भावी पीढी में जागरूकता लाये -एसके द्विवेदी

ग्वालियर विश्व धरोहर सप्ताह के अन्तर्गत पुरातत्व संग्रहालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ग्वालियर किला पर आयोजित कार्यक्रम में प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व जीवाजी विश्वविद्यालय एवं पर्यटन के छात्र-छात्राओं ने ग्वालियर एवं चम्बल संभाग में स्थित राष्ट्रीय संरक्षित स्मारकों, प्राचीन धरोहरों को बचाने एवं भावी पीढी में इनके प्रति जागरूकता लाने के लिए एक परिचर्चा में भाग लिया।
इस कार्यक्रम के आज के जीवाजी विश्वविद्यालय के पुरातत्व अध्यनशाला के विभागाध्यक्ष मुख्य अतिथि डॉ. एसके द्विवेदी, एके. पाण्डे रिटायर्ड अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं एनके.समाधिया रिटायर्ड उप-अधीक्षण पुरातत्व केमिस्ट, विशिष्ट अतिथि थे। इस कार्यक्रम मंे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपालय मण्डल, भोपाल के अधीक्षण पुरातत्वविद, डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ऑन लाईन कार्यक्रम में राष्ट्रीय धरोहरों, प्राचीन धरोहरों को बचाने एवं भावी पीढी में जागरूकता लोने हेतु छात्र-छात्राओं को सम्बोधित कर रहे थे। डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ने कहा कि ग्वालियर को विश्व धरोहर में शामिल करने के लिये हम पूरी तरह प्रयास कर रहे है।
विभागाध्यक्ष डॉ. एसके द्विवेदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमारी ऐतिहासिक पूर्वजों से प्राप्त धरोहरों को बचाने के लिए जन भागीदारी आवश्यक है। एनके पाण्डे ने कहा कि हम लोगों का नैतिक कर्तव्य है कि हमारी धरोहरों को बचायें सुरक्षित रखें।
एनके समाधिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि पूर्वजों से प्राप्त धरोहर को सहेजने के लिए जागरूकता जरूरी है। पुरातत्व अध्यनशाला एवं पर्यटन के छात्र-छात्राओं ने परिचर्चा में बताया कि कई एतिहासिक धरोहरें जो केन्द्र या राज्य के अधीन संरक्षित नहीं है वह उपेछा की शिकार हो रही है कई लोग उन्हें खराब कर रहे है बर्बाद कर रहे हैं। आज के इस कार्यक्रम में ग्वालियर पुरातत्वविद सहायक अधीक्षण शशिकान्त राठौर, उद्यान सहायक मनोज मीणाएवं समस्त स्टॉफ विशेष रूप से उपस्थित रहा है।

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