महीनों ऑफिस नहीं आती है आरटीओ, एक हस्ताक्षर के लिये कई महीनों चक्कर लगाने पड़ते

मुरैना. स्कूलों में लगे कंडम वाहन नौनिहालों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। पिछले दिन पॉपुलर पब्लिक स्कूल के एक कंडम वाहन के पलटने से 12 स्कूली छात्र गंभीर रूप से घायल हो गये। वहीं पोरसा के चौमों में एक निजी स्कूल का कूलेंट फट गया जिसमें उसमें सवार 2 बच्चे गंभीर रूप से झुलस गये। इसके पीछे क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। आरटीओ ने पिछले एक साल से स्कूल वाहनों के फिटनेस की जांच नहीं की है। जिसससे कंडम हो चुके स्कूलों के यह वाहन बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। आपको बता दें कि स्कूल बसों की जांच तो दूर आम बसों की भी जांच नहीं की जाती है। वजह आरटीओ अर्चना परिहार कार्यालय में नहीं आती है। लोगों ने ऐसा बताया कि वह कई-कई हफ्तों तक कार्यालय नहीं आती है। जिससे कार्यालय में आने वाले लोगों को खामी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आरटीओ के एक हस्ताक्षर के लिये कई महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं।

मुरैना आरटीओ बाबुओं के सहारे, घर से चल रहा अफसरी
मुरैना का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय बाबुओं के भरोसे चल रहा है। आरटीओ अर्चना परिहार कार्यालय में ही नहीं आती है। नाम न छापने की शर्त पर बाबुओं ने बताया कि जरूरी दस्तावेजों का ेवह उनके ग्वालियर स्थित निवास पर ले जाते हैं और वहीं से हस्ताक्षर करा लाते हैं।
कण्डम वाहन से बच्चों का जीवन संकट में
पॉपुलर पब्लिक स्कूल की जिम वैन में बच्चे आ रहे थे वह पूरी तरह कंडम हो चुकी है। ऐसा बताया जा रहा है कि वैन नम्बर एमपी06टी0488 का लम्बे समय से फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं बना है। स्कूल संचालक ने भी वैन का फिटनेस कराने की आवश्यकता नहीं समझी । वह भी फीस के रूप में मोटी रकम लेने बावजूद बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है।
कंडम वाहन का फट गया कूलेंट
गुरूवार को ही दूसरा हादसा पोरसा क्षेत्र के चोमों गांव में घटा जहां एक निजी स्कूल की वेन का कूलेंट (इंजन को ठंडा करने वाला तरल पदार्थ) फट गया इससे स्कूल की उस कंडम वेन में सवार 2 स्कूली छात्र लकी सिंह भदौरिया व पंकज भदौरिया के पैर की चमड़ी झुलस गयी। बच्चों को चौमों गांव से अटेर के लिये स्कूल की वेन में ले जाया जा रहा था।
आरटीओ ने कलेक्टर का फोन ही नहीं उठाया, बोले कार्यवाही करेंगे
आरटीओ अर्चना परिहार से फोन पर बात करना चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं दूसरी ओर कलेक्टर मुरैना का कहना है कि उन्होंने डीईओ से इस संबंध में जांच रिपोर्ट मांगी और उसके बाद वाहनों की जांच की जायेगी। आरटीओर द्वारा कार्यालय से नदारद रहने पर उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
नहीं हो रहा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन कराने के लिये कलेक्टर, एसपी, आरटीओ, जिला शिक्षा अधिकारी, डीपीसी व ट्रैफिक पुलिस को स्कूल संचालकों के साथ बैठकर खास चर्चा की जाना थी। लेकिन वह भी नहीं की गयी। अगर यह चर्चा हो जाती तो शायद कंडम वाहनों पर लगाम लग सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब बच्चों की जान पर बन आयी फिर भी जिला व पुलिस प्रशासन इस ओर से आंख बंद किये बैठा हैं।

