मप्र के 3 आईपीएस अधिकारियों पर इलेक्शन कमीशन के आदेश से ईओडब्ल्यू में होगी एफआईआर
भोपाल. चुनाव आयोग ने मप्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) केमप्र कैडर में तैनात 3 अधिकारियों सहित उन सभी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआइआर) दर्ज कराने के निर्देश दिये हैं इन तीनों अधिकारियों पर 2019 के आम चुनाव के बीच कालाधन ले जाने के आरोप लगे थे। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के परिजनों और उनके सहयोगियों के यहां मारे गये छापों के बाद आरोप लगाये थे। चुनाव आयोग ने केन्द्रीय मुख्य सचिव से भी इन अधिकारियों के खिलाफ उपयुक्त विभागीय कार्यवाही करने के लिये कहा है। मप्र के मुख्य सचिव (सीएस) से भी इसी तरह की कार्यवाही करने के लिये कहा गया है। आयकर विभाग ने छापों में पाया था कि 2019 के आम चुनाव में भारी मात्रा में नगदी उपयोग किया गया था। इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग की शीर्ष संस्था केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चुनाव आयोग को भेजी थी। चुनाव आयोग ने कहा है कि उसने इस रिपोर्ट के सभी पहलुओं पर विचार विमर्श के बाद ही यह निर्देश दिये हैं।
ईसी से जारी बयान के अनुसार सीबीडीटी की रिपोर्ट में बताया गया था कि इन अधिकारियों की एक राष्ट्रीय पार्टी की ओर से कुछ लोगों तक पहुंचाने में भूमिका रही है। आयोग नेे अपने बयान में किसी पार्टी का नाम नहीं लिया है, लेकि यह बिलकुल स्पष्ट है कि यह बोर्ड का इशारा कांग्रेस पार्टी की ओर है। इलेक्शन कमीशन ने मप्र के सीईओ को 28 अक्टूबर 2020 को ही यह रिपोर्ट भेज दी थी। इसमें सीईओ को निर्देश दिये गये थे िकवह 3 अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज करायेगा।
क्या है पूरा मामला
आयकर विभाग दिल्ली की इंवेस्टिगेशन विंग ने 2019 में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़, सलाहकार राजेंद्र मिगलानी, मोजेर बियर कंपनी के मालिक भांजे रतुल पुरी और एक अन्य कारोबारी अश्विन शर्मा के 52 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे। 8 अप्रैल को आयकर विभाग ने 14.6 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी बरामद की थी। इसके साथ बड़े पैमाने पर डायरियां और कंप्यूटर फाइल जब्त की थीं। इनमें सैकड़ों करोड़ रुपए के लेनदेन के हिसाब थे। बाद में आयकर विभाग ने बताया था कि दस्तावेजों में यह प्रमाण मिले हैं कि 20 करोड़ रुपए की राशि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के दिल्ली स्थित मुख्यालय भेजा गया। इन छापों में कुल 281 करोड़ रुपए के लेनदेन के पुख्ता प्रमाण मिले थे। यह पैसा विभिन्न कारोबारियों, राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों से एकत्र किया गया था। यह 20 करोड़ रुपए की नकदी हवाला के माध्यम से तुगलक रोड स्थित एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के मुख्यालय को भेजी गई थी।आयकर विभाग की जांच में यह सामने आया था कि कांग्रेस पार्टी के दिल्ली स्थित मुख्यालय को 20 करोड़ नहीं, बल्कि 106 करोड़ रुपए भेजे गए थे। इसके अतिरिक्त विकास ढिंगरा नामक व्यक्ति के खाते में 72 करोड़ रुपए भेजे गए। आयकर विभाग की यह जांच विकास ढींगरा नामक व्यक्ति पर भी केंद्रित रही। जिसमें पाया गया है कि ढींगरा अप्रैल 2019 को ही विदेशी चला गया था। इसके बाद अब तक नहीं लौटाा। हालांकि विभाग का दावा है कि वह इस रकम के लेनदेन का सीधे लाभार्थी नहीं है। वह केवल रकम एक जगह से दूसरी जगह भेजने का माध्यम भर है।
चार अधिकारियों पर हैं लगे आरोप
आईपीएस अधिकारी है संजय माने, वी मधुकुमार और सुशोभन बैनर्जी जबकि अरूण मिश्रा मप्र राज्यपुलिस सेवा के अधिकारी हैं।
दिल्ली के सीए ललित चलानी के संबंध कमलनाथ के नजदीकियों से जुडे
सूत्रों के अनुसार 7 अप्रैल 2019 को आयकर ने छापे मारे थे, उनमें मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नजदीकी 5 लोग शामिल थे। जिसमें बड़े पैमाने पर पैसों के लेनदेन के सबूत मिले थे। इसके बाद इकट्ठा किये गये सबूत और रिपोर्ट सीबीआई को भेज दिये गये थे। इनकमटैक्स विभाग ने चुनाव आयोग को सबूत और जांच रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें लोकसभा चुनाव के बीच 11 उम्मीदवारों को कथित तौर पर भारी रकम ट्रांसफर किये जाने का आरोप है। यह जानकारी दिल्ली के एक युवक ललित कुमार चेलानी के कम्प्यूटर से मिली थी। चेलानी सीए हैं जो कमलनाथ के नजदीकी आरके मिंगलानी के साथ काम कर चुके हैं। चेलानीी के अकांउट से ही ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी को रकम का भुगतान करने के साक्ष्य आयकर विभाग को मिले थे।

