नेशनल हाईवे की सड़कों को जेसीबी खुदवाकर भरे सैम्पल, 12 सड़कों के सैम्पल की स्पेशल टीम ने की जांच, NHAI की सड़कों की पहली बार हुई जांच

ग्वालियर. वर्षभर में 12 से अधिक सड़कें धंसने और शहर की सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठने क बाद हाईकोर्ट ने अब नेशनल हाइवे का भी फैक्ट चेक शुरू कर दिया है। गुरूवार को हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच कमीशन ने मेहरा टोल से लेकर सिकरौदा चौराहे के बीच आगरा-मुुंबई हाइवे पर 6 जगहों के सड़कों का सैम्पल के लियंे खुदवाया है। सड़क की अलग-अलग परतों से डामर, गिट्टी और बेस मटेरियल के सैम्पल लिये गये है। इन्हें लैब में भेजकर निर्माण की गुवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच की जायेगी।
यह पहला मौका है जब हाईकोर्ट के निर्देश पर एनएचएआई की सड़क को इस तरह मौके पर खोदकर उसके निर्माण की वास्तविक जांची जा रही है। जांच टीम की निगरानी में सड़क की परतें हटाकर सैम्पल लिये गये ताकि कागजों में दर्ज निर्माण सामग्री और मौके पर उपयोग सामग्री का मिलान किया जा सकै।

शहर की सड़कों के बाद हाइवे की सड़कों का नम्बर
शहर की खस्ता हाल सड़कों को लेकर अधिवक्ता अवधेशसिंह तोमर की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों की रिपोर्ट के बजाय मौके पर स्वतंत्र जांच के निर्देश दिये थे। इसके लिये वकीलों और तकनीकी विशेषज्ञों की 4 सदस्यीय टीम बनाई गयी। टीम ने पहले शहर की प्रमुख सड़कों की स्कैनिंग की। विक्की फैक्ट्री से झांसी रोड़, चेतकपुरी-सिंधिया महल गेट और चेतकपुरी -एजी ऑफिस पुल तक सड़क की स्थिति, डामर करी परत और गड्ढों की जांच की गयी। इसके बाद 19 अगस्त को गुढ़ी-गुढ़ा का नाका और बेटी-बचाओ चौराहे की सड़क से कोर सैम्पल लिये गये। अब इसी जांच का दायरा आगरा-मुंबई हाइवे तक बढ़ाया गया है।
पहले कैमरों से नापी सड़क
हाईकोर्ट कमीशन ने रविवार को शहर की सड़कों की हाईटेक स्कैनिंग की थी। वैक्यूम और लेजर कैमरों की सहायता से सड़क की सतह, समतलीकरण और डामर की स्थिति रिकॉर्ड की गयी। निष्पक्षता बनाये रखने के लिये जिन सड़कों के सैम्पल लिये जाने है। उनकी लोकेशन पहले से सार्वजनिक नहीं की जा रही है। सैम्पलिंग से लगभग आधे घंटे पहले सड़क तय करने की व्यवस्था की गयी है।
अब हाईवे से लिए गए नमूनों की जांच पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला, ग्वालियर में होगी। यहां डामर की मात्रा, गिट्टी की गुणवत्ता, कॉम्पैक्शन और सड़क की विभिन्न परतों की मजबूती की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी, जिसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और संभावित अनियमितताओं पर स्थिति साफ हो सकेगी।
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