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वर्षा के बीच मकान की छत गिरने मां-बेटे की मौत, 2 बेटियों की हालत गंभीर

ग्वालियर. डबरा में वर्षा के बीच 2 मंजिला कच्चे मकान की छत नीचे गिर गयी। मलबे में परिवार के 5 सदस्य दब गये। इनमें से 2 लोगो की मौत हो गयी। 3 अस्पताल में उपचार के लिये भर्ती कराये गये। परिवार लगभग 15 वर्षो से किराये के मकान में रहता ािा। हादसा जंगीपुरा इलाके में बुधवार की रात 11.30 बजे हुआ। आवाज सुनकर पड़ोसी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस को खबर दी। टीम और स्थानीय लोगों ने मिलकर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला और डबरा सिविल अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में 2 वर्षीय आदित्य रजक उर्फ गुन्नू की मौत हो गयी। उसकी मां सीमा ने उपचार के बीच में ही दम तोड़ दिया। वहीं, सीमा के पति जागेन्द्र रजक 38, और बेटियां -वैशाली 5, रागनी 8, ग्वालियर के लिये रेफर किया गया है।

हादसे के बाद की 5 तस्वीरें…

रजक परिवार जिस मकान में रह रहा था, वह जर्जर हालत में था।
रजक परिवार जिस मकान में रह रहा था, वह जर्जर हालत में था।

मकान की छत का मलबा नीचे सो रहे परिवार पर गिरा।
मकान की छत का मलबा नीचे सो रहे परिवार पर गिरा।
घायल परिवार को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।
घायल परिवार को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।
जागेंद्र, वैशाली और रागनी को प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर कर दिया गया।
जागेंद्र, वैशाली और रागनी को प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर कर दिया गया।
परिजन और पड़ोसियों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया।
परिजन और पड़ोसियों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया।

इलाज में बरती लापरवाही
हादसे की जानकारी मिलने के बाद परिजन और स्थानीय निवासी अस्पताल पहुंचे। परिजन ने अस्पतालकर्मियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पड़ोसी वीरू रजक ने कहा- जब सीमा को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी सांसें चल रही थीं। बेहतर इलाज मिलता तो जान बच सकती थी।
हंगामे का पता चलते ही एसडीएम नवकिरण कौर, एसडीओपी सौरभ कुमार और तहसीलदार नवीन भारद्वाज अस्पताल पहुंचे। परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी। एसडीएम कौर ने मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने परिजन को आर्थिक मुआवजा दिलाने की बात भी कही।परिवार का मुखिया जागेंद्र रजक ग्वालियर की जूता फैक्ट्री में काम करता था। रोजाना ट्रेन से आता-जाता था। सीमा झाड़ू-पोंछे का काम करती थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार जर्जर मकान में रह रहा था।जागेंद्र के भाई राघवेंद्र रजक ने कहा- हम दोनों भाई आसपास ही रहते हैं। जागेंद्र की दो बेटियां- नैंसी और गौरी हादसे के समय हमारे घर पर थीं, इसलिए सुरक्षित बच गईं।

 

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