जीवाजी विश्वविद्यालय की फीस बढ़ोतरी का छात्रों ने किया विरोध
ग्वालियर. जीवाती विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिनन प्रशासनिक और अकादमिक सेवाओं की फीस में की गई वृद्धि पर छात्रों की नाराजगी के बाद संशोधन के संकेत दिए है। कुलगुरू प्रो. रामकुमार आचार्य ने छात्रों की मांगों पर विचार करने की बात कही है। कुलगुरू रामकुमार आचार्य ने बताया कि फीस वृद्धि को लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की कुछ मदों में साल 2012 के बाद से कोई फीस वृद्धि नहीं हुई थी। इन मदों की समीक्षा के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक समिति का गठन किया था।
छात्रों की आपत्ति का असर, लिया गया अहम निर्णय
समिति ने विभिन्न सेवाओं की फीस का अध्ययन करने के बाद अपनी अनुशंसाएं विश्वविद्यालय को सौंपी थीं। कुलगुरु के अनुसार, समिति ने फीस तय करते समय मध्यप्रदेश के अन्य शासकीय विश्वविद्यालयों में लागू शुल्क का भी तुलनात्मक अध्ययन किया था। इसके आधार पर जीवाजी विश्वविद्यालय में प्रस्तावित फीस निर्धारित की गई थी। कुलगुरु ने यह भी कहा कि संशोधित फीस लागू होने के बाद भी जीवाजी विश्वविद्यालय की फीस प्रदेश के अन्य शासकीय विश्वविद्यालयों की तुलना में कम ही थी। हालांकि, छात्रों की ओर से फीस में अत्यधिक वृद्धि को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन अब इसमें राहत देने की तैयारी में है। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि छात्रों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित फीस में संशोधन किया जाएगा और इसे अधिक युक्तिसंगत बनाया जाएगा।
500-1000 तक हुई थी फीस में वृद्धि
दरअसल, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई सेवाओं की फीस में बड़ी वृद्धि प्रस्तावित की गई थी। इसमें ट्रांसक्रिप्ट की फीस 210 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए, पात्रता प्रमाण-पत्र अटेस्ट की फीस 150 से बढ़ाकर 700 रुपए और पात्रता प्रमाण-पत्र सामान्य की फीस 100 से 400 रुपए करने का प्रस्ताव था। इसी तरह, टीसी सामान्य की फीस 50 से 200 रुपए और माइग्रेशन अटेस्ट की फीस 150 से बढ़ाकर 500 रुपए करने का प्रस्ताव था। इसके अतिरिक्त, री-टोटलिंग, डुप्लीकेट अंकसूची और नाम परिवर्तन जैसी अन्य सेवाओं की फीस में भी वृद्धि की गई थी।

