एलिवेटेड रोड-स्वर्णरेखा नदी के मुहाने से लेकर “हनुमान बांध” नदी के अंदर तक खड़े किए पिलर
ग्वालियर-एलीवेटेड रोड के दूसरे चरण का कार्य तेजी से चल रहा है। स्वर्णरेखा नदी के मुहाने से लेकर “हनुमान बांध” तक पिलर नदी के अंदर खड़े किए जा चुके हैं। इसके आगे हनुमान बांध के अंदर पिलर खड़े करने का कार्य लगभग पूर्ण होने पर आया है। इसके लिए नदी में पुल बनाने की तकनीक (कॉफरडैम तकनीक) का उपयोग किया गया है।
इसके आगे पिलर खड़े करने का कार्य निजी भूमि का अधिग्रहण नहीं किए जाने के कारण अटका हुआ है। पीडब्ल्यूडी विभाग निजी भूमि का अधिग्रहण करने की कार्रवाई कर रहा है।
गिरवाई से ट्रिपल ITM कॉलेज तक एलीवेटेड रोड का निर्माण किया जा रहा है। यह एलीवेटेड रोड स्वर्णरेखा नदी के ऊपर गुजर रही है। इसके पहले चरण का कार्य लगभग “80 प्रतिशत” पूर्ण हो चुका है, जबकि दूसरे चरण में पिलर बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वर्णरेखा नदी के मुहाने अर्थात हनुमान बांध के पास किसी-किसी हिस्से में सड़क बना दी गई है। हनुमान बांध में भी पिलर बनाने का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। हनुमान बांध को बिना खाली किए पीडब्ल्यूडी ने कॉफरडैम तकनीक से पिलर खड़े किए हैं। इस तकनीक का उपयोग बहती नदी एवं बड़े बांधों के ऊपर पुल बनाने के लिए किया जाता है।
ऐसे काम करती है कॉफरडैम तकनीक
कॉफरडैम तकनीक में पिलर खड़े करने वाले स्थान तक मशीनों के पहुंचने के लिए मिट्टी डालकर रास्ता तैयार किया जाता है। इसके बाद बड़े-बड़े लोहे के पाइपों को बांध की तली में गाड़ दिया जाता है। इसके बाद मशीनों एवं कर्मचारियों की मदद से नीचे की गाद एवं मिट्टी को हटाई जाती है। इसके साथ ही पाइपों को धीरे-धीरे ठोस तली तक वजन की मदद से नीचे पहुंचाया जाता है। पानी एवं मिट्टी हटाने के बाद इसके अंदर पिलर खड़े करने का काम किया जाता है। इस तकनीक से समुद्र, बहती हुई नदी एवं बांधों पर पुल तैयार किए जाते हैं।
बारिश में काम हुआ बंद
एलीवेटेड रोड के निर्माण का कार्य बारिश में बंद कर दिया गया है। निर्माण के दौरान “200 टन वजनी स्लैब आदि” को पहुंचाने के लिए नदी के अंदर बनाई गई मिट्टी की सड़क को हटा दिया गया है। इसके कारण भारी वाहन सामान लेकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं स्वर्णरेखा नदी के किनारे बनी सड़क का उपयोग वहां पर ट्रैफिक एवं आमजनों की आवाजाही के कारण नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों को डर है कि कहीं कोई हादसा हो गया तो इतनी भारी वजन से जनहानि हो सकती है।
निजी जमीन का अधिग्रहण से अटका काम
हनुमान बांध के आगे पिलर खड़े करने का काम फिलहाल अटका हुआ है। हनुमान बांध के आगे की जमीन निजी है। इस जमीन का अभी तक अधिग्रहण नहीं हो सका है। इस जमीन को अधिग्रहण करने की प्रक्रिया अभी भी प्रचलन में है।
आपने कहा
“कॉफरडैम तकनीक का उपयोग कर हनुमान बांध में पिलर खड़े किए जा रहे हैं। पिलर खड़े करने का काम लगभग पूर्ण हो चुका है, साथ ही अधिग्रहण की कार्रवाई भी की जा रही है।”
जगेंद्र सिंह, कार्यपालन यंत्री, सेतु संभाग पीडब्ल्यूडी

