MP में UCC की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री बोले- 90% से अधिक जनता पक्ष में

भोपाल. मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता देने की तैयारी के बीच इसका विरोध भी किया जाने लगा है। धार्मिक संगठनों के प्रमुख इसके खिलाफ हैं। धर्मगुरुओं का कहना है कि लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता समाज के हित में नहीं है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने यूसीसी में लिव इन के प्रविधान शामिल करने का विरोध किया है।
महिला आयोग और सुझावों की स्थिति
महिला आयोग की सदस्य साधना स्थापक का भी कहना है कि लिव इन रिलेशनशिप पर अलग से चर्चा होनी चाहिए। कम उम्र में बच्चे गलत निर्णय ले लेते हैं। इस मुद्दे पर अलग से समिति होनी चाहिए। एक सुझाव यह भी आया कि लिव इन रिलेशनशिप में रहना है तो 30 दिनों में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
विधेयक के प्रारूप की समय-सीमा
इधर, समिति की तैयारी है कि 30 जून तक प्रक्रिया पूरी कर पांच जुलाई तक विधेयक का प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंप दिया जाए। सरकार की मंशा 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इसे प्रस्तुत करने की है। यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर धार्मिक सामाजिक संगठनों के अधिकतर प्रमुखों ने यूसीसी में मान्यता नहीं देने का सुझाव रखा है।
यूसीसी के पक्ष में हैं 90 प्रतिशत से अधिक नागरिक : मुख्यमंत्री
मंगलवार को मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए सभी जिलों में जनपरामर्श बैठकें हो चुकी हैं। राज्य स्तरीय परामर्श 22 जून को भोपाल में हुआ। इसमें सभी आयोगों, विभागों, राजनीतिक दलों और धर्मगुरुओं से पृथक-पृथक बैठकें आयोजित कर मत लिया गया।
लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस यूसीसी के सुझाव आमंत्रित करने के लिए समग्र के हितग्राहियों को भेजे गए। नागरिकों के नौ लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, 90 प्रतिशत से भी अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ है। विधेयक के प्रारूप पर समिति द्वारा विधि विभाग के साथ साझा रूप से कार्य किया जा रहा है।

 

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