KGP-1 चीता ने फिर से सोन चिडि़या अभ्यारण इलाके में दी दस्तक
ग्वालियर. लगभग 80 दिनों तक अलग-अलग वन इलाकोकं में विचरण करने के बाद चीता केजीपी-1 एक बार फिर से ग्वालियर के घाटीगांव स्थित सोन चिडि़या अभ्यारण्य के आसपास पहुंच गयाहै। चीते की लोकेशन मिलते ही वन विभाग की टीम अलर्ट हो गयी है। उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वन अधिकारियों के अनुसार यह चीता पिछले कई दिनों से शिवपुरी और नरवर के घने जंगलों में लगातार घूम रहा था। लम्बी दूरी तय करने के बाद उसने प्राकृतिक वन्यजीव मार्गी यानी वन कॉरिडोर का इस्तंेमाल करते हुए ग्वालियर जिले के लखनपुरा और चंदूपुरा वन इलाके में प्रवेश किया। वन अधिकारियों का कहना है कि चीता पूर्व में भी कई बार इस रूट का उपयोग कर चुका है।जिसके चलते यह मार्ग अब उसके नियमित विचरण इलाके का पार्ट बनता जा रहा है। यही कारण है कि वह बिना किसी बाधा के दोबार इस इलाके तक पहुंच गया।
कॉलर आईडी से चीते को कर रहे ट्रैक
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि चीता स्वभात से शर्मीला और शांत वन्यजीव माना जाता है। जो सामान्य परिस्थितियों में इंसानों से दूरी बनाये रखता है। उसका मुख्य उद्देश्य भोजन और सुरक्षित आवास की तलाश करना होता है। विभाग का कहना है कि लोगों को अनावश्यक रूप से घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन जंगल से लगे इलाकों में सावधानी बरतना जरूरी है। चीते की दोबारा आमद के बाद कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन और वन विभाग की विशेष ट्रैकिंग टीम पूरी तरह से सक्रिय हो गयी है। चीते की लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखने के लिये सैटेलाइट कॉलर से प्राप्त संकेतों के साथ साथ ग्राउंड मॉनिटरिंग भी की जा रही है। विशेषज्ञ लगातार उसके मूवमेंट का अध्ययन कर रहे है। ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
चीते की मौजूदगी की पुष्टि उस समय हुई, जब चंदूपुरा क्षेत्र में एक बकरी का शिकार किए जाने की सूचना सामने आई। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों के बीच चीते को लेकर चर्चा शुरू हो गई। जहां एक ओर लोगों में दुर्लभ वन्यजीव को देखने की उत्सुकता दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर पशुपालकों ने अपने मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई। सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और क्षेत्र का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई।

