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जीवाजी विश्वविद्यालय कार्य परिषद की 4 घंटे चली बैठक में कई अहम निर्णय, गेस्ट फैकल्टी मानदेय वृद्धि पर बनेगी समिति

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य की अध्यक्षता में कार्य परिषद (EC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कुलसचिव राजीव मिश्रा सहित कार्य परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। विभिन्न प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद कई अहम निर्णयों को मंजूरी प्रदान की गई।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी का मानदेय बढ़ाने का रहा। इस संबंध में सदस्यों ने वर्तमान मानदेय को अपर्याप्त बताते हुए वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया। विस्तृत अध्ययन एवं सुझाव प्रस्तुत करने के लिए दो दिनों के भीतर एक समिति गठित करने का निर्णय लिया। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आगामी बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत संचालित कुछ महाविद्यालयों के स्थानांतरण से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। सदस्यों ने संबंधित कॉलेजों की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस विषय पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने का निर्णय लिया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में स्थित गेस्ट हाउस के नवीनीकरण (रिनोवेशन) को भी कार्य परिषद की स्वीकृति मिल गई। लंबे समय से गेस्ट हाउस के आधुनिकीकरण और सुविधाओं के विस्तार की मांग की जा रही थी। स्वीकृति मिलने के बाद भवन में आवश्यक मरम्मत, सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाएं विकसित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
बैठक में विश्वविद्यालय के प्रमुख सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों के केंद्र गालव सभागार की स्थिति पर भी चर्चा हुई। परिषद ने सभागार में एयर कंडीशनिंग सिस्टम, प्रकाश व्यवस्था तथा कुर्सियों की मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों को मंजूरी प्रदान की। अधिकारियों का मानना है कि इन कार्यों के पूरा होने के बाद सभागार में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
ईसी सदस्य के प्रस्ताव विरोध में कुलगुरू
28 अप्रैल को कार्य-परिषद की बैठक में बिंदु क्रमांक 20 पर किये जा रहे संशोधन पर ईसी सदस्य प्रदीप शर्मा ने आपत्ति दर्ज कराई है। जबकि बिंदु क्रमांक 20 में संशोधन के प्रस्ताव लाया गया था। इसमें बाहरी व्यक्ति का नाम बतौर एक्सपर्ट जोड़ने का मामला था। इसमें अधिनियम 1973 की कंडिका 1 (5) सरासर उल्लंघन बताया गया है। यह प्रस्ताव कार्य परिषद के सदस्य प्रदीप शर्मा द्वारा लाया गया था।
भवन समिति का गठन
अध्यक्ष ’कुलगुरू, सदस्य -कलेक्टर, नगर निगम के अधीक्षण यंत्री, पीडब्ल्यूडी से अधीक्षण यंत्री, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालनयंत्री, सदस्य -कुलसचिव, कार्य परिषद् द्वारा नामित किये 2 ईसी सदस्य, सदस्य- विश्वविद्यालय यंत्री और पदेन सचिव आदि को शामिल किया गया है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में बीएससी कॉलेज से संबंधित छात्रों को राहत दी गई। परिषद ने निर्णय लिया कि जिन विद्यार्थियों ने फीस अथवा अन्य भुगतान बैंकिंग माध्यम से किए हैं, उन्हें बैंक स्टेटमेंट के आधार पर भुगतान का प्रमाण मानते हुए आवश्यक मान्यता प्रदान की जाएगी। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जिनके पास भुगतान की अन्य रसीदें उपलब्ध नहीं हैं।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के विकास कार्यों, वित्तीय मामलों, शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। सदस्यों ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्य परिषद की बैठक में ईसी सदस्य प्रदीप शर्मा, मनु, रितु नामधारी, प्रमोद सक्सेना, प्रो. महापात्रा, गणेश दुबे, प्रो. बापट सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों को विश्वविद्यालय के विकास और छात्रों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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