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कृषि जमीन-बिना मायनिंग परमिशन के 250 फीट अवैध खनन कर डाला, मायनिंग विभाग सोता रहा

खनन के बाद दूर से दिखाई देता गड्‌ढा। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. बिलौआ इलाके में पर्यावरण और कानून के नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रूपये की खनिज चोरी का एक बड़ा घोटाले का खुलासा हुआ है। एक क्रेशर संचालक ने बिना किसी अनुमति के निजी व कृषि जमीन पर 200 फीट से अधिक गहरा खोदकर अवैध उत्खनन कर करोड़ों रूपये का पत्थर साफ कर दिया है।
इस भ्रष्टाचार में हैरान करने वाली बात यह है कि बिना अनुमति के इतना बड़ा डेथ ट्रैप का (मौत का कुआ) बनाने के बावजूद खनिज विभाग सोता रहा और अब उसी खुदी हुई जमीन को बैध करने के लिये बाकायदा ‘‘लोक सुनवाई’’ तक की प्रक्रिया शुरू करा दी गयी है। हद तो तब हो गयी जब बिना मौके पर भौतिक निरीक्षण किये सैद्धांतिक अनुमति तक मिल गयी। जब इस मामले की शिकायत कलेक्टर ग्वालियर के पास पहुंची। तब जाकर खनिज विभाग में हड़कम्प मच गया। अब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अजीबो-गरीब और हास्यास्पद दलीलें दे रहे है। कोई गलती से खुदाई होने की बात कहते हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालते हुए नजर आ रहा है।
3 सर्वे नम्बर से खोदा गया पत्थर
ऐसा पता चला है कि मेसर्स राजेन्द्रप्रसाद खंडेलवाल द्वारा ग्राम बिलौआ के 3 प्रमुख सर्वे नम्बरों पर पत्थर (गिट्टी) के उत्खनन की नयी अनुमति मांगी गयी है। प्रभावित सर्वे नम्बर 3578, 3575, 1, 2 और 3570, 1 कुल रकबा 2.315 हैक्टर हैं। चौंकाने वाला सच यह है कि इस जमीन पर मायनिंग की पर्यावरणीय स्वीकृति की फाइल अभी पास भी नहीं हुई थी। लेकिन क्रेशर संचालक ने यहां कई महीनों से पहले ही भारी मशीनें उताकर लगभग 200-250 फीट गहरे गड्ढे कर दिये गये है। जब शिकायत के बाद इन सर्वे नम्बरों की सैटेलाइट इमेज निकाली गयी तो साफ दिखाई कि वहां लम्बे समय से अवैध उत्खनन जारी था और करोड़ों का काला पत्थर गायब किया जा चुका था।
रॉयल्टी का 30 गुना जुर्माना दबाने की साजिश
खनिज नियमों के मुताबिक, यदि कोई बिना अनुमति के अवैध उत्खनन करता है, तो पकड़े जाने पर कुल खनिज और रॉयल्टी का 30 गुना जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। यह राशि करोड़ों रुपये बैठती है। बिलौआ के इस खेल में अधिकारियों ने क्रेशर संचालक को फायदा पहुंचाने के लिए न तो कोई जुर्माना लगाया और न ही खदान सील की। उल्टा, पर्यावरण विभाग के साथ मिलकर गुपचुप तरीके से फाइल आगे बढ़ा दी गई। अधिकारी मौका मुआयना करने भी पहुंचे, लेकिन किसी ने यह नहीं लिखा कि “जिस खदान की अनुमति मांगी जा रही है, वह तो पहले ही पूरी खुदी पड़ी है।”

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