आगे भी पेट्रोल-डीजल के बढ़़ सकते हैं दाम अभी महज 3 रूपये , नयी चेतावनी
नई दिल्ली. शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के कीमतों में 3 रूपये प्रतिलीटर की वृद्धि कर दी गयी है। लेकिन यह सिलसिला अब आगे भी जारी रहने की संभावना है। पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर एक्सपर्ट्स ने बड़ी चेतावनी दे दी है। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो आगामी 3-4 महीने में ईधन की कीमतें बढ़ने का अनुमान है।
यह चेतावनी ऐसे वक्त में आई है। जब वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल तेज आपूर्ति में रूकावट का लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस 110 डॉलर प्रति बैरल के नजदीक पहुंच गयी है। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में लगभग 4 साल में पहली बार 15 मई को वृद्धि की गयी है। क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती लागत की वजह से सरकार तेल डिस्ट्रीब्यूटर कम्पनियों (ओएमसी) पर दबाव बढता जा रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती है ता हालियां वृद्धि से तेल और अन्य व्यापारी कम्पनियां को हो रहे नुकसान की आंशिक तौर से भरपाई हो पायेगी।
नुकसान की भरपाई के लिए रुपये की बढ़ोतरी संभव
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में, अगर ग्लोबल नजरिए में कोई बदलाव नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती है। तो नुकसान की भरपाई के लिए कुल मिलाकर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत होगी.। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिससे घरेलू ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की गतिविधियों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है।
तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं ने आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं को तेजी से बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती से तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है, जबतक की रिटेल फ्यूल की कीमतों में और बदलाव नहीं किया जाता है।
इकोनॉमिस्ट ने भी चेतावनी दी है कि ईंधन की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी धीरे-धीरे महंगाई और घरेलू बजट पर असर डाल सकती है, क्योंकि इससे सभी क्षेत्रों में परिवहन और रसद की लागत बढ़ जाएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में सरकारी हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

