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पत्नी ने पति के साथ रहने से किया इंकार, प्रेमी के साथ रहने पर बनी सहमति तो बेटा पिता के पास रहेगा

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में गुरूवार को वैवाहिक विवाद का अनोखा मामला सुनवाई के दौरान ही अप्रत्याशित मोड लेता नजर आया है। पत्नी को अवैध रूप से बंधक बनाये जाने के गंभीर आरोपों के बीच जब महिला का हाईकोर्ट में पेश किया गया तो पूरे मामले की दिशा ही बदल गयी।
छरअसल, पति लाखन कडेरे ने हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को प्रतिवादी पक्ष द्वारा जबरन अपने पास रखे हुए है। उसे उससे मिलन नहीं दिया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को पेश करने के निर्देश दिये थे। निर्देश क पालन में जब महिला को हाईकोर्ट में पेश गया किया तो न्यायालय ने उसकी स्वतंत्र इच्छा जाननी चाही तो महिला ने स्पष्ट शब्दों में कहा है किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं है। उसने बताया कि वह अपनी मर्जी से राकेश नामक व्यक्ति के साथ रह रही है। पति के साथ जाना नहीं चाहती है।
अवैध बंधक बनाने का आरोप कमजोर
महिला के इससबयान के बाद ‘‘अवैध बंधक’’ बनाये जाने का आरोप स्वतः ही कमजोर पड़ गया और याचिका का मूल आधार खत्म हो गया। इसके बाद हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई। जिसमें आपसी सहमति से विवाद को समाप्त करने का रास्ता निकाला गया। समझौते के तहत ही पति लाखन कडेरे ने पत्नी का तलाक देने पर सहमति जता दी। हालांकि उसने स्थाई गुजारा भत्ता (एलिमनी) नही देने की शर्त रखी। जिसे महिला ने स्वीकार कर लिया। दोनों के 4 वर्षीय बेटे की कस्टडी पिता के पास रखने पर भी सहमति बनी। इस फैसले पर महिला के पिता ने भी अपनी मंजूरी दे दी।
सुनवाई का औचित्य नहीं- हाईकोर्ट
दोनों पक्षों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति बनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कोर्ट ने मामले को निष्फल मानते हुए निपटा दिया।
इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वैवाहिक विवादों में अदालत का प्रमुख उद्देश्य पक्षकारों की स्वतंत्र इच्छा और सहमति को महत्व देना होता है। साथ ही, यह भी दर्शाता है कि कई बार अदालत की प्रक्रिया के दौरान ही ऐसे मामलों का समाधान आपसी समझ और सहमति से निकल सकता है।

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