अवैध खनन रोकने में मध्यप्रदेश की सरकार रही फेल, वनरक्षक की हत्या का जिम्मेदार कौन-सुप्रीम कोर्ट

मुरैना. वनरक्षक की हत्या और चम्बल नदी पर बने पुल की नींव तक अवैध खनन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार पर कड़ा रूख अपनाया है। हाईकोर्ट ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाये है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के बीच में कहा है कि यदि रेत माफिया पुल की नींव तक खोद रहे है। वन अधिकारियों को कुचलकर मार रहे है। ऐसे में राज्य सरकार की भूमिका पर प्रश्न खड़े होते है। हाईकोर्ट ने पूछा कि यदि पुल गिर जाता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट में पिलर के नीचे गड्‌ढों का खुलासा किया था।
ऑफीसर की मिली भगत से हो सकती है
हाईकोर्ट ने कहा है कि यह घटनायें संकेत देती हैकि यदि या तो राज्य सरकार अवैध खनन रोकने में असफल रही है या फिर इसमें ऑफीसरों की मिलीभगत हो सकती है। होईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सब राज्य सरकार की निगरानी में हो रहा है जो बेहद चिंताजनक है।
पुुल की नींव तक खुदाई
राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला नेशनल हाइवे -44 का चम्बल पुल मुरैना के राजघाट क्षेत्र में स्थित इस पुल की कई पिलरों के नीचे तक रेतमाफिया द्वारा लगभग 15 फीट तक खुदाई किये जाने की बात सामने आई है। जिससे संरचना की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो गया है। क्या मुरैना पुलिस प्रशासन को चम्बल नदी में अवैध रेत उत्खनन होता दिखाई नहीं देता क्या प्रशासन अंधा है। अवैध उत्खनन रोकने क्या-क्या प्रयास किये गये। यह क्यों रूक नहीं पा रहा है। इस सब की जानकारी सुप्रीम कोर्ट ने तलब की है।
वनरक्षक को कुचल कर मारने की रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने वनरक्षक की हत्या के मामला में अभी तक की जांच की स्थिति रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पेश करने के निर्देश दिये है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जो 17 अप्रैल को सुनाया जायेगा।

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