SIR अधिकारियोे को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बंगाल सरकार को लगाई कड़ी फटकार, यह सोची-समझी साजिश
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारी के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख दिखाया है। राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शनमके संबंध में रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है। जहां न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था। चीफ जस्टिस ने कहा हैकि मुझे कल रात सख्त आदेश जारी करना पड़ा, तभी प्रशासन हरकत में आया। क्योंकि घेराव किये गये न्यायिक अधिकारी का 5 वर्षीयबालक भी घर में था।
क्या है बंगाल विवाद
दरअसल, एसआईआर प्रोसेस पूरा होने के बाद बंगाल में कई जगह विपक्ष ने वोटर लिस्ट सेस नाम डिलीट करने में आरोप लगाये हैं। इसे लेकर जगह-जगह विपक्षी कार्यकर्त्ता विरोध कर रहे हैं। मालदा में एसआईआर से जुड़े न्यायिक अधिकारी के घराब होने का मामला भाजपा ने भी उठाया था। भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बंगाल-सरकार पर कई तरह के आरोप लगाये हैं। उन्होंने कहा कि कालीचक्र-।। बीडीओ कार्यालय को घेर लिया था। उत्तरी और दक्षिणी बंगाल का संपर्क पूरी तरह से कट गया था। क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने एनएच-12 को पूरी तरह से जाम कर दिया था। 3 महिलाओं समेत 7 न्यायिक अधिकारी अन्दर फंसे थे। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गयी थी।
अमित ने आगे कहा था कि 7 न्यायिक अधिकारी कालीचक्र -।। स्थित बीडियो कार्यालय के अन्दर फंसे रहे। जिसे एक बड़ी भीड़ ने चारों तरफ से घेर लिया था। स्थानीय सुरक्षाकर्मियों ने बाहर की स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बताया है। न सिर्फ कार्यालय से बाहर निकलने का रास्ता बंद था। बल्कि सभी रास्तों पर कई जगह सड़कों को भी जाम दिया गया।जिससे कहीं भी आना-जाना बेहद खतरनाक हो गया था। उन्होंने आगे दावा किया है कि जिला न्यायाधीश के निर्देशों का पालन करते हुए। अधिकारियों ने एक साथ रहने का फैसला किया। जोखिम को कम करने के लिये अकेले कहीं भी आने-जाने से परहेज किया। हालांकि स्थिति लगातार बिगड़ती गयी। जिला और पुलिस प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप की सख्त जरूरत थी। सभी अधिकारियों की सुरक्षित निकाली सुनिश्चित करने के लिये पर्याप्त अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किये जाने थे। अमित मालवीय ने आगे कहा कि कानून -व्यवस्था को इस तरह से ध्वस्त होने नहीं दिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
चीफ जस्टिस ने मुख्य सचिव, गृह सचिव डीजीपी और जिला मजिस्ट्रेटों समेत सूब के टॉप अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया है कि पहले से जानकारी होने के आवजूद वह अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने में असफल क्यों रहें। अपने आदेश में बेंच ने कहा है कि न्यायिक अधिकारी घेराव दोपहर के बाद लगभग 3.30 बजे शुरू हुआ। महापंजीयक ने प्रशासनिक प्राधिकारी को सूचित कर तत्काल कार्यवाही कर अनुरोध किया कि रात 8.30 बजे तक कुछ नहीं किया गया है। तब गृहसचिव से संपर्क किया गया। डीजीपी ने हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश के साथ ग्रुप कॉल किया। जल्द कार्यवाही का आश्वासन दिया गया। लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गयी।
इसके बाद कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अपने पत्र में कहा है कि न तो जिला मजिस्ट्रेट और न ही पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंच है। चीफ जस्टिस को राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी और गृहसचिव को बुलाना पड़ा। सीजेआई ने कहा हैकि कल हुई घटना इस अदालत के अधिकारियों को चुनौती देने की एक शेमलेस प्रयास था। न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने और प्रक्रिया को रोकने के लिये यह एक अच्छी तरह से सोच विचार वाला कदम था। मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव का आचरण विलकुल निंदनीय था।

