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मुरैना महापौर शारदा सोलंकी जाति प्रमाण पत्र वैध है-हाईकोर्ट

मुरैना. नगरनिगम के महापौर चुनाव से जुड़ा एक मामला ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बुधवार को फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने महापौर शारदा राजेन्द्र प्रसाद सोलंकी को राहत देते हुए BJP उम्मीदवार मीना मुकेश जाटव की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। उच्चस्तरीय समिति की जांच में शारदा सोलंकी के जाति प्रमाण पत्र को वैध ठहराया गया है।
यह मामला वर्ष 222 के नगरनिगम चुनाव से संबंधित है। जिसमें मुरना महापौर का पद अनुसूचित जाति महिला के लिये आरक्षित था। इस चुनाव में कांग्रेस की शारदा सोलंकी विजयी हुई थी। जबकि भाजपा की मीना जाटव दूसरे स्थान पर रही थी। मीना जाटव ने शारदा सोलंकी के निर्वाचन को जिला न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि जब उच्चस्तरीय जांच समिति ने प्रमाण पत्र को सही ठहराया है और याचिकाकर्त्ता भी इस निर्णय को स्वीकार कर चुकी है। पुनरीक्षण याचिका का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।
जिला कोर्ट खारिज कर चुका था आवेदन
आरोप-अयोग्य होते हुए भी नामांकन दाखिल किया
मीना जाटव का तर्क था कि शारदा सोलंकी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा की निवासी हैं, इसलिए मध्य प्रदेश में जारी उनका अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र अमान्य है। उन्होंने आरोप लगाया था कि सोलंकी ने अपने पति के नाम का उपयोग कर धोखे से स्थानीय जाति प्रमाण पत्र बनवाया और चुनाव में अयोग्य होते हुए भी नामांकन दाखिल किया। इस मामले में जिला न्यायालय ने मई 2024 में मीना जाटव का आवेदन खारिज कर दिया था। इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में सिविल रिविजन याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था और बुधवार को इस पर निर्णय सुनाया।

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