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पटेल स्कूल भवन विवाद में मालिकों को मिलेगा कब्जा, हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल प्रबंधन चलाना भवन का मालिकाना हक नहीं देता

ग्वालियर. हाईकोर्ट ग्वालियर ने पटेल मिडिल स्कूल, हजीरा से जुड़े भवन विवाद में राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने साफ कहा है कि सिर्फ स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में लेने से सरकार को भवन का मालिकाना हक नहीं मिल जाता। दरअसल, स्कूल जिस भवन में चल रहा है। वह बालकृष्ण अग्रवाल और उनके साथियों की निजी संपत्ति है। उन्होंने यह भवन 1978 में राज्य सरकार को किराये पर दिया था। ताकि उसमें स्कूल चलाया जा सके। उसी साल सरकार ने स्कूल का प्रबंधन संभाल लिया। लेकिन इसके बाद कई सालों तक मकान मालिकों किराया नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि भवन में अवैध निर्माण भी किया गया है। इस पर उन्होंने स्कूल को भवन से निकालने के लिये कोर्ट में मामला दर्जक कराया गया।
मकान मालिक के पक्ष निचली अदालतों ने दिया फैसला
निचली अदालत और फिर जिला न्यायालय दोनों ने मकान मालिकों के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की। कहा गया कि स्कूल के अधिग्रहण के साथ ही भवन भी सरकार की संपत्ति बन गया है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी दस्तावेजों में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि भवन को अधिग्रहित किया गया था। इसमें साफ-साफ लिखा है कि स्कूल किराए के भवन में चल रहा था और हर महीने 125 रुपए किराया तय किया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300 (क) के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति की संपत्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के सरकार नहीं ले सकती। ऐसा में मकान मालिकों ने कोर्ट में भवन खाली कराने का आवेदन दिया है। वहीं, शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूल में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं और बारिश का मौसम और सत्र के बीच का समय होने की वजह से उन्हें एकदम से दूसरी जगह शिफ्ट करना मुश्किल है।

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