जमीन की डिनोटिफाई की अधिसूचना जारी कर दी थी, रेत के लिये सेंचुरी से बाहर, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से 511 एकड बाहर
मुरैना. एक किमी के नो मायनिंग जोन को बेअसर करने जीरो इको सेंसिटिव जोन का प्लान था। राष्ट्रीय चम्बल घडियाल अभ्यारण्य में अवैध रेत उत्खनन पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद एमपी-राजस्थान सीमा पर स्थित राजघाट पुल समेत 6 प्रमुख घाटों पर विशेष सशस्त्र बल की तैनाती कर दी गयी हैं लेकिन इस कार्यवाही के बीच जांच पड़ताल में सिस्टम के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है।
यह खेल था चम्बल सेंचुरी की 207.049 हेक्टर (511.63) एकड़ जमीन को रेत माफिया के हवाले करने का, इसके लिये बाकायदा गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया था। डिनोटिफाई इलाके में जिला प्रशासन राजघाट (76.90) हेक्टर जमीन, बरवासिन घाट (118.60 हैक्टर) और बड़ौदिया बिंदी घाट (9.489) हेक्टर पर कानूनी खनन शुरू कराने की फिराक में था। इस नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के दबाव के बाद आखिरकार 3 फरवरी 2025 को सरकार को निरस्त करना पड़ा।
अवैध को वैध था ऐसा- एनजीटी में पेश चालान टेकन रिपोर्ट से सामने आई सच्चाई
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय को सौंपी गयी मध्यप्रदेश सरकार की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) की पड़ताल करने पर चम्बल को कानूनी तौर पर बांटने की इस पूरी क्रोनोलॉजी का खुलासा हुआ है।

