सिंधिया राजघरान के समझौते के बीच सबसे दस्तावेज ‘‘द कोवेनेंट’’

ग्वालियर. सिंधिया राजघराने के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया ने न्यायालय में पारिवारिक समझौते का आवेदन कोर्ट में दिया था। आवेदन सहमति से समझौते का था। जिसके आधार पर ज्योतिरादित्य, उनकी बुआ वसुंधरा व यशोधरा के बीच बंटवारा हो रहा था। लेकिन अब पारिवारिक समझौते की चर्चाओं के बीच कोर्ट में अब नयी कानूनी अड़चन आ गयी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी बुआ वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे के बीच चल रही बात के दौरान ज्योतिरादित्य की बड़ी बुआ स्व0 पदमाराजे सिंधिया (त्रिपुरा राजघराना) की बेटी प्रतिमा देवी ने अदालत में कैविएट दायर कर दी है।

‘‘द कोवेनेंट’’ क्या है
आजादी के समय ग्वालियर सहित मध्यभारत की रियासतों का भारत सरकार में विलय हुआ था। इस समझौते (‘‘द कोवेनेंट’’) में तत्कालीन राजाओं को टैक्स-फ्री भत्ता तय किया गया था। जिसमें सबसे अधिक भत्ता ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के तत्कालीन महाराज जेएएम सिंधिया को मिलता था।
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट में चल रही कानूनी जंग अब बेहद दिलचस्प और उलझते मोड़ पर पहुंच गई है। इस ऐतिहासिक केस के पटाक्षेप के लिए 78 साल पुराना विलय पत्र यानी ‘द कोवेनेंट’ सबसे अहम दस्तावेज बनकर सामने आया है। दिल्ली के नोटरी द्वारा सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित यह दस्तावेज कोर्ट के समक्ष आ चुका है, जिसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और राजाओं को मिलने वाले टैक्स फ्री ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है।

