गेहूं खरीद आढ़तिया धर्मवीर भदौरिया फरार

ग्वालियर। ग्वालियर कृषि उपज मंडी में आज किसानों ने मंडी परिसर को सिर पर उठा लिया। यह वे किसान हैं जिन्होंने भरोसे में अपनी साल भर की मेहनत आढ़तिया को थमाई और किसानों का गेहूं तौलने के बाद जब पैसे लेने दोबारा आए तो आढ़तिया अपनी फर्म का शटर डाउन करके गायब हो गया। इसके खिलाफ आज किसानों ने मंडी में जमकर प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि कृषि उपज मंडी के अफसर इस आढ़तिया के मिले हुए हैं, इसलिए यहां से उनके खिलाफ शिकायत भी नहीं कर रहे हैं।
यह है मामला
इस मामले में किसान आढ़तिया धर्मवीर भदौरिया के खिलाफ भड़के हुए कृषि उपज मंडी में आढ़त है। 2 साल पहले इसने यह खरीद की थी। इसके बदले में किसानों को चेक भुगतान यही चेक दिए गए थे। किसानों ने साल से धर्मवीर सिंह भदौरिया के चेक लगाए गए हैं। जब इनका सब्र का बांध टूट गया तो आज यह प्रदर्शन करने पहुंच गए। किसानों का कहना है कि धर्मवीर भदौरिया और उसका मुनीम अर्चित शर्मा अब उन्हें लाखों लाख रुपये भी नहीं मिल रहे हैं। हमारा पैसा फंसा हुआ है।
इस मामले में सबसे अहम बात तो यह है कि किसानों के लाखों रुपये फंसे हुए हैं और सभी जिम्मेदार मौन हैं। दो साल से किसान कृषि उपज मंडी में चक्कर काट रहे हैं। पुलिस व्यवस्था लागू है। कृषि उपज मंडी के अधिकारियों की एक नहीं सुन रहे हैं और पुलिस कहकर किसानों को चलता कर देती है कि 3&4 दिन में पैसे मिल जाएंगे। जब किसान चेक दिखाते हैं तो पुलिस कहती है कि साबित करो कि यह चेक गेहूं की बिक्री के बदले में मिला है। कुल मिलाकर गेहूं खरीदने वाले किसानों का पैसा कृषि उपज मंडी, पुलिस के साथ-साथ लेनदेन करने वाले धर्मवीर सिंह भदौरिया के बीच फंस रहा है।
घर तक हो आए
धर्मवीर की खोज में किसान पिछले 2 सालों से लगे हैं। यह किसान दूर-दराज के गांवों के हैं और पूछते-पाछते धर्मवीर सिंह भदौरिया के घर तक पहुंच चुके हैं पर वहां से भी इन्हें भगा दिया जाता है। किसानों से जब इस मामले में बात की गई तो किसान फूट पड़े। उनका कहना था कि हद हो गई है। सारा सिस्टम आरोपी को बचाने के लिए खड़ा है। हम परेशान हो रहे हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर जब भदौरिया परिवार के पक्ष जानने की कोशिश की गई तो वे लगातार मोबाइल कॉल काटते रहे।

