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भावनात्मक कमजोरी से शूरू होता है लब जिहाद-हर्षा रिछारिया

हर्षा रिछारिया भोपाल की रहने वाली हैं।

ग्वालियर. महाकुम्भ से चर्चा में आई भोपाल की हर्षा रिछारिया एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार कारण उनका एक वीडियो है।जिसमें उन्होंने ‘‘लव जिहाद’’ जैसे संवेदनशील और विवादित मुद्दे पर अपनी बात रखी है। अहम बात यह है कि उन्होंने इस विषय को किसी सामान्य बहस की तरह नहीं। बल्कि अपने निजी अनुभव से जोउ़ते हुए समझाने का प्रयास कियाहै। वीडियो में उन्होने मोहम्मद अशहर द्वारा भेजे गये लगातार मेल्स का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह यह पूरी बातचीत उन्हें एक बड़े सामाजिक मुद्दे पर सोचने के लिये प्रेरित करती हैै।
हर्षा रिछारिया के अनुसार पिछले कुछ दिनों में उन्हें एक अशहर नाम के व्यक्ति के कई मेल मिले। इन मेल्स में उसने बार-बार उनका हालचाल पूछा और उसने यह जानने का प्रयास किया है िकवह कैसेी हैं, कहां है, उनकी तबियत ठीक है या नहीं और वह सोशल मीडिया पर पोस्ट क्यों नहीं कर रही है। इतना ही नहीं। उसने उनके करियर और भविष्य का लेकर भी चिंता जताई। उसने कहा कि नाम और फेम से आगे बढ़कर आय के स्थाई स्त्रोत और भविष्य की योजनाओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। हर्षा ने बताया हैकि उस शख्स ने कभी भी उनके लिये अपमानजनक शब्दों का उपयोग नहीं किया। बल्कि एक सामान्य इंसान की तरह संवेदन/ाीलता के साथ बात की।
कौन हैं हर्षा
प्रयागराज महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े के पेशवाई के रथ पर बैठने पर हर्षा रिछारिया चर्चा में आईं थीं। पेशे से मॉडल, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया का साध्वी रूप देखकर संत समाज के लोगों ने आपत्ति जताई थी। मामले को तूल पकड़ता देख उन्होंने बीच में ही महाकुंभ छोड़ दिया था। रोते हुए उन्होंने मीडिया सुसाइड की धमकी भी दी थी। रिछारिया का परिवार मूलत:उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है। उनके पिता दिनेश बस कंडक्टर और मां किरण रिछारिया बुटीक चलती हैं। एक भाई कपिल भी है जो प्राइवेट जॉब करता है, पूरा परिवार मध्य प्रदेश के भोपाल में रहता है। हालांकि, हर्षा उत्तराखंड में रहती हैं। हर्षा पीले वस्त्र, रुद्राक्ष माला और माथे पर तिलक धारण करती हैं। वह आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं।
मेल से शुरू हुई कहानी, समाज की सोच तक पहुंची बात
वीडियो में हर्षा ने इस अनुभव को आधार बनाते हुए कहा कि यही वह स्थिति होती है, जहां से कई बार लड़कियां गलत दिशा में चली जाती हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी लड़की को अपने ही समाज और करीबी लोगों से समर्थन की जरूरत होती है, तब उसे अक्सर आलोचना, ताने और उपहास का सामना करना पड़ता है। उसे ‘फेक’, ‘पाखंडी’, ‘दिखावटी’ जैसे शब्दों से संबोधित किया जाता है, जिससे वह मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाती है। हर्षा का कहना है कि जब कोई व्यक्ति लगातार इस तरह के व्यवहार का सामना करता है, तो उसके भीतर एक खालीपन और असुरक्षा की भावना पैदा हो जाती है। ऐसे में अगर कोई बाहरी व्यक्ति सहानुभूति दिखाता है, हालचाल पूछता है और भावनात्मक सहारा देता है, तो वह जल्दी भरोसा जीत लेता है।

 

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