दीनारपुर जमीन मामले में प्रमुख सचिव को अवमानना नोटिस, नई स्टे्टस रिपोर्ट तलब
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दीनारपुर स्थित 18,880 वर्गमीटर जमीन से जुड़े मामले में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल द्वारा पेश की गयी स्टेट्स रिपोर्ट खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने उन्हें दोबारा नयी स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये है। प्रमुख सचिव के खिलाफ अवमानना का नोटिस भी जारी किया गया है। जिस पर अलग से सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि यह भी स्पष्ट नहीं है। ग्वालियर कलेक्टर प्रस्तुत रिपोर्ट को प्रमुख सचिव ने कभी स्वीकार किया था या नहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार अब भी अस्पष्ट जवाब दाखिल कर रही है।
जिम्मेदार सेवा निवृत्त अधिकारी
सरकार की ओर से बताया गया है कि अधिकारी नेहा तामडे इस देरी के लिये जिम्मेदार थी। चूंकि वह वर्ष 2021 मैं सेवानिवृत्त हो चुकी है। इसलिये उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद शासन ने 2012 से 2019 के बीच इस केस में प्रभारी रहे अधिकारियों की सूची पेश की। हालांकि इन अधिकारियों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। केवल अश्विनी रावत और आरआई रामसेवक मांझी को नोटिस जारी किया गया है।
ऐसे शुरू हुआ दीनारपुर जमीन विवाद
दीनारपुर स्थित जमीन को शासन ने अतिशेष घोषित किया था। इसके खिलाफ रामदयाल, देवाबाई और अन्य लोगों ने कोर्ट में याचिका दायर की। 30 अगस्त 2003 को कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया। राज्य सरकार ने 2008 में इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसे 30 अप्रैल 2012 को निरस्त कर दिया गया। कारण यह था कि निजी पक्षकारों की मृत्यु हो चुकी थी और शासन ने बार-बार अवसर मिलने के बाद भी उनके वारिसों को पक्षकार नहीं बनाया था।
तकनीकी आधार पर निरस्त हुई अपील को दोबारा सुनवाई में लेने के लिए राज्य सरकार ने 1788 दिन बाद एमसीसी दायर की। शासन का तर्क था कि जमीन बहुत कीमती है, इसलिए केवल तकनीकी देरी के आधार पर मामले को छोड़ना उचित नहीं होगा।

