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101वे तानसेन समारोह&-देश का सर्वाधिक प्रतिष्ठित संगीत महोत्सव 14 से 19 दिसम्बर तक 

संगीत की नगरी ग्वालियर में 101वे तानसेन समारोह के आयोजन की तैयारियाँ शुरू  
ग्वालियर संगीतधानी ग्वालियर के आंगन में देश और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संगीत महोत्सव “तानसेन समारोह” के तहत लय, सुर व ताल की सभाएँ सजने की बेला आ गई है। तानसेन समारोह का 101वाँ आयोजन पूरी गरिमा व भव्यता के साथ आयोजित करने के उद्देश्य से मंगलवार को संभाग आयुक्त की अध्यक्षता में स्थानीय समिति की बैठक आयोजित हुई। समारोह को गरिमामय बनाने के लिये बैठक में गहन विचार मंथन हुआ। साथ ही सदस्यों ने उपयोगी सुझाव दिए।
भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश का सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव “तानसेन समारोह” संगीत की नगरी ग्वालियर में इस साल 14 से 19 दिसम्बर तक आयोजित होगा। यह सालाना समारोह भारतीय संगीत की अनादि परंपरा के श्रेष्ठ कला मनीषी संगीत सम्राट तानसेन को श्रद्धांजलि व स्वरांजलि देने के लिये पिछले 100 साल से आयोजित हो रहा है। इस साल समारोह का 101वाँ वर्ष है। समिति के सदस्यों को भरोसा दिलाया कि बैठक में आए अच्छे सुझावों पर ध्यान देकर तानसेन समारोह के कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि समारोह में अधिकाधिक संगीत रसिक पहुँचें। इसके लिये समारोह का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए।
संभाग आयुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित हुई तानसेन समारोह की स्थानीय समिति की बैठक में विधायक मोहन सिंह राठौर, मंत्रिगण, विधायकगण एवं महापौर के प्रतिनिधिगण, उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, प्रभारी कलेक्टर कुमार सत्यम, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं संगीत व कला मर्मज्ञों सहित समिति के अन्य सदस्यगण व संबंधित अधिकारी मौजूद थे। स्थानीय समिति की बैठक में संभाग आयुक्त ने सभी आयोजन स्थलों पर जिला प्रशासन, पुलिस व नगर निगम से संबंधित सभी व्यवस्थायें पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही कहा कि सुर सम्राट तानसेन की जन्मस्थली बेहट में भी समारोह की सभा से संबंधित सभी व्यवस्थायें गुणवत्ता के साथ पूर्ण करें।
 “गमक” में मूर्धन्य उप शास्त्रीय संगीत कलाकार की होगी प्रस्तुति  
तानसेन संगीत समारोह के एक दिन पहले पहले यानि 14 दिसम्बर को इंटक मैदान में “गमक” का आयोजन होगा। इसके लिए समिति के सदस्यों ने उप शास्त्रीय संगीत के ख्यातिनाम कलाकारों के नाम सुझाव स्वरूप बताए। दुनियाभर में विख्यात मूर्धन्य गायक पं. हरिहरण एवं श्री शंकर महादेवन  सहित अन्य प्रतिष्ठित कलाकारों के नाम समिति के सदस्यों ने सुझाए हैं। संभाग आयुक्त ने कलाकारों से शीघ्र संपर्क कर गमक के लिये कलाकार का नाम तय करने के निर्देश निदेशक संगीत एवं कला अकादमी को दिए।
चार दिन पहले से सजेंगीं पूर्वरंग “गमक” की संगीत सभायें, स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मौका  
इस साल के तानसेन संगीत समारोह के मुख्य आयोजन से चार दिन पहले से यानि 10 दिसम्बर से पूर्वरंग की श्रृंखला में संगीत सभायें आयोजित करने का सुझाव समिति के सदस्यों ने दिया है। संगीत की नगरी ग्वालियर में इन सभाओं के आयोजन के लिये जल्द से जल्द 10 प्रमुख् स्थल चयनित करने के लिये आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं संगीत व कला मर्मज्ञों से कहा है। गमक श्रृंखला की सभायें संगीत की नगरी ग्वालियर के अलावा शिवपुरी, दतिया एवं बटेश्वर में भी सजेंगीं। समिति के सदस्यों ने इन सभाओं में स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां रखने का सुझाव दिया है। साथ ही इन सभाओं में अधिक से अधिक रसिकों की भागीदारी के लिये सुबह और शाम सभायें रखने के सुझाव भी आए हैं।
15 दिसम्बर को प्रात:काल से एवं सायंकाल होगा औपचारिक शुभारंभ 
101वे तानसेन समारोह का औपचारिक आगाज 15 दिसम्बर को होगा। इस दिन सुबह 10 बजे हजीरा स्थित सुर सम्राट तानसेन की समाधि पर शहनाई वादन, ढोलीबुआ महाराज की हरिकथा एवं मीलाद वाचन से समारोह का पारंपरिक शुभारंभ होगा। सायंकाल 6 बजे समारोह की मुख्य सभाओं के लिए बनाए गए भव्य मंच पर औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही इस अवसर पर “राष्ट्रीय तानसेन सम्मान” एवं “राष्ट्रीय राजा मानसिंह सम्मान” समारोह भी प्रस्तावित है। हर साल की तरह वादी-संवादी कार्यक्रम भी होंगे। चित्रकला पर केन्द्रित कार्यक्रम व प्रदर्शनी लगाने के लिये भी आयोजन से जुड़े अधिकारियों से कहा गया है।
मुख्य समारोह में 10 संगीत सभाएँ होंगीं
तानसेन संगीत समारोह में इस साल 10 संगीत सभाएं होंगी। पहली सभा 15 दिसंबर को सायंकाल तानसेन समाधि परिसर में बनाए गए भव्य मंच पर सजेगी। इसके बाद हर दिन यहीं पर प्रातः एवं सायंकालीन सभाएं होंगी। समारोह के आखिरी दिन यानि 19 दिसंबर को प्रातःकालीन सभा संगीत शिरोमणि तानसेन की जन्मस्थली बेहट में और इस साल के समारोह की अंतिम संगीत सभा सायंकाल गूजरी महल परिसर में सजेगी।
किले पर इस बार “समवेत” कार्यक्रम में एक हजार कलाकार एक साथ करेंगे गायन 
तानसेन समारोह के दौरान इस बार ऐतिहासिक ग्वालियर दुर्ग पर “समवेत” कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में लगभग एक हजार कलाकारों द्वारा एक साथ शास्त्रीय गायन प्रस्तावित है।

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