हाईकोर्ट का फैसला जवान की संपत्ति का नॉमिनी होने से पूरा अधिकार नहीं, पत्नी और मां बराबद की हिस्सेदार
ग्वालियर. हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी संपत्ति या सेवा लाभ पर केवल नॉमिनी होने से पूरा अधिकार नहीं मिलता। न्यायालय ने दिवंगत सीआरपीएफ जवान अतुल सिंह तोमर की पत्नी और मां को बराबर का वारिस मानते हुए आधा-आधा हिस्सा देने का ट्रॉयल न्यायालय का आदेश बरकरार रखा है। सीआरपीएफ गनर अतुलसिंह तोमर की शादी नेहा तोमर से 5 मार्च 2016 को हुई थी। 26 अप्रैल 2017 को सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गयी। इसके बाद उनकी मां सुधा तोमर, पिता, भाई और बहन ने उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिये आवेदन किया। वहीं पत्नी नेहा तोमर ने भी अलग से आवेदन दायर किया।
एक्स-ग्रेशिया राशि के लिये अलग से वाद दायर करें
न्यायालय ने साफ किया है कि नॉमिनी को केवल पैसे प्राप्त करने का अधिकार होता है। लेकिन वह उसके वास्तविक मालिक नहीं होते है। उत्तराधिकार कानून के तहत पत्नी और मां दोनों बराबर के हिस्सेदार है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि विभाग द्वारा दी गयी 25 लाख रूप्ज्ञये की एक्स-ग्रेशिया राशि को लेकर अगर कोई आपत्ति है तो उसके लिये अलग से दीवानी वाद दायर करना होगा।
ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2019 में सुनाया था फैसला
ट्रायल कोर्ट ने 13 फरवरी 2019 को आदेश दिया था कि जवान की पत्नी और मां को बराबर हिस्सा मिले। इस फैसले को मृतक के मृतक के माता-पिता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क था कि वे सेवा अभिलेखों में नॉमिनी हैं, इसलिए पूरा लाभ उन्हें मिलना चाहिए।

