सरकारी जमीन का मामला-हाईकोर्ट में सरकार का सही पक्ष नहीं रखने वाले अधिकारियों बख्शा नहीं जायेगा-मुख्य सचिव
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की एकल पीठ ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर सख्त टिप्पणियों के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने न्यायालय में हलफनामा पेश किया है। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में जानबूझ कर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जायेगा। इस संबंध में एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) और एक प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को नोटिस जारी कर जांच शुरू कर दी गयी है।
क्या है मामला
यह कार्रवाई हाईकोर्ट द्वारा 28 अक्टूबर 2025 को एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई गंभीर टिप्पणियों के बाद हुई है। कोर्ट ने सवाल उठाया था कि क्या सरकार ऐसे अधिकारियों को संरक्षण दे रही है, जो जानबूझकर मामलों को तकनीकी आधार पर खत्म होने दे रहे हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य की ओर से कार्यरत अधिकारी जानबूझकर लापरवाही कर रहे हैं, ताकि निजी पक्षकारों को लाभ मिल सके और अपीलें तकनीकी आधार पर खारिज होती रहें। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य अपनी संपत्तियों की रक्षा में उदासीन है, और अधिकारी मामले को सही दिशा में ले जाने की बजाय निजी पक्षकारों को खुला रास्ता देने की कोशिश में हैं। यह पूरा प्रकरण 2013 में खारिज हुई एक अपील से जुड़ा है। इस अपील में एक प्रतिवादी का निधन 2011 में ही हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद अपील मृत व्यक्ति के नाम पर ही दाखिल की गई थी।
हाईकोर्ट ने ली थी आपत्ति
हाईकोर्ट ग्वालियर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि सरकार को इस तथ्य की जानकारी थी। फिर भी उसके कानूनी वारिसों को जोड़ने विलम्ब माफी मांगने या अबेटमेंट हटाने की कोई प्रक्रिया समय पर नहीं अपनायी गयी। न्यायालय द्वारा बिलंब माफ करने के लिये उदार रूख अपनाने के बावजूद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।

