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वीरपुर बांध के गेट पुलिस की मौजूदगी में खोले गये, जलभराव को लेकर न्यायालय में लगी जनहित याचिका पर की गयी सुनवाई

ग्वालियर. लगातार हो रही वर्षा की वजह से शहर क हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे है। जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। वीरपुर बांध के गेट कार्यपालन यंत्री अग्निवेश और सहायक यंत्री की देखरेख में खोले गये है। जैसे-जैसे बांध का जलस्तर कम हो रहा है। वैसे-वैसे इलाके में जल भराव स्थिति ठीक हो रही है और  हनुमान बांध में पानी भरने लगा है।
सन 1910 में बना था “वीरपुर बांध” 
पुरातत्व के जानकार इन्द्रदेव सिंह ने बताया कि वीरपुर बांध का इतिहास किया है और इसे किसने कौन से सन बनवाया था। मोर छठ पर्व पर हर साल लगता है मेला। सन 1993 के 32 साल बाद लबालब भरा वीरपुर बांध  रोज शाम ढलते आते हैं सैलानी । ग्वालियर के हृदय स्थल महाराज बाड़ा से मात्र 6 किमी दूर सिकंदर कंपू इलाके में बना वीरपुर बांध इस साल हुई झमाझम बारिश से जलस्तर 28 फीट तक पहुंच गया, वीरपुर बांध के पास ही  सन 1812 में सिकन्दर का बनवाया हुआ एक प्राचीन चर्च भी है, यह चर्च अब सेंट टेरेसा स्कूल के कैंपस में है  चित्र 3 में मार्च महीने में वीरपुर बांध पूरी तरह सूख गया था।

अधिवक्ता अवधेश सिंह भदोरिया ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका की प्रस्तुत

पुष्कर कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष एवं रिटायर्ड आर्मी कैप्टन उद्देश्य सिंह भदोरिया द्वारा अधिवक्ता अवधेश सिंह भदोरिया के माध्यम से हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका इस आशय की प्रस्तुत की गई कि ग्वालियर शहर की आबादी करीब 16 लाख से ज्यादा हो चुकी है। हर वर्ष ग्वालियर शहर का विस्तार हो रहा है । लेकिन ड्रेनेज तथा सीवर सिस्टम व्यवस्थित न होने के चलते हर वर्ष बरसात के मौसम में ग्वालियर शहर की हालत बद से बद्तर हो जाती है। इस वर्ष ग्वालियर शहर का सीवर सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है । जगह-जगह जल भराव एवं सीवर की गंदगी से ग्वालियर शहर की आधी से ज्यादा आबादी का जीवन नर्क बन चुका है, हर वर्ष ग्वालियर शहर डेंगू चिकनगुनिया जैसी महामारी की चपेट में आ जाता है ।मध्य प्रदेश शासन सहित जिला प्रशासन तथा नगर निगम ग्वालियर शहर के नागरिकों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मुहैया कराने में पूरी तरह से असफल है। इस वर्ष भी ग्वालियर में सीवर लाइन चौक होने से कॉलोनी की गलियों सहित कॉलोनी के पार्कों तथा लोगों के घरों में सीवर भरा हुआ है जिससे इस वर्ष भी ग्वालियर शहर के महामारी की चपेट में आने की पूरी आशंका है।

जल भराव के मुद्दे पर लगी याचिका
हाईकोर्ट ग्वालियर में जलभराव को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बैंच ने नगरनिगम अधिकारियों के रवैये पर तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकारी सुविधाये ंतो पूरी चाहते हैं लेकिन काम नहीं करना चाहते है। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि ऐसे अधिकारियों की निगरानी के लिये एक अलग से सेल बनाई जाये। जनता की शिकायतें दर्ज कर जांच कर सकें।
जल भराव को लेकर मंत्री और सांसद आमने-सामने
वीरपुर बांध के गेट पर बैल्डिंग करने के बाद विधायक और सांसद आमने-सामने आ गये। जिसमें एक पक्ष गेट को खोलकर जलभराव की स्थिति को ठीक करना चाहता था तो दूसरा पक्ष नहीं चाहता था वीरपुर बांध के गेट खोले जायें। इसलिये इस मुद्दे पर राज्य सरकार दखलंदाजी करते हुए वीरपुर बांध के गुरूवार की सुबह 10 बजे खोले गये। जिन्होंने के मकान बांध के कैचमेंट एरिया इलाके में बने उनमें पानी भरना तय है। तो इसके लिये सरकारी अधिकारी कर्मचारी तो जिम्मेदार नहीं है। मकान बनाने से पहले यह सोचना चाहिये था बांध का पानी छोड़ा जायेगां तो इस पानी हमारे घरों में भरेगा।
नगर निगम आयुक्त को कोर्ट ने दिए निर्देश
यह याचिका अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया सुनवाई के दौरान नगर निगम आयुक्त संघप्रिय सहित अन्य अधिकारी कोर्ट में मौजूद रहे। कोर्ट ने आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को जनता के प्रति व्यवहार में सुधार लाने को कहें। जो अधिकारी जनता के कॉल रिसीव नहीं करते, उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बारिश से बिगड़े हालात, जलभराव से जनजीवन प्रभावित
लगातार हो रही बारिश के चलते ग्वालियर शहर की सड़कें तालाब बन गई हैं। कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। नगर निगम की ओर से जल निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई है। नगर निगम आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि जलभराव की समस्या को सुलझाने के लिए लगभग 150 पॉइंट चिन्हित किए गए हैं। इन जगहों पर स्थायी समाधान की योजना बनाई जा रही है। जहां पानी भरता है, वहां पंप लगाने का प्रस्ताव है ताकि बारिश के पानी की निकासी की जा सके।

 

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