‘महाराज’ के हाथ में ‘सरकार’ का ‘रिमोट’
ग्वालियर. ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहारे ही बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई, यह सब जानते हैं। सबसे अहम है कि शिवराज चौथी बार मुख्यमंत्री बने। शुरुआत में ऐसा लगा कि शिवराज को सरकार चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। वजह- विचारधारा और समन्वय, लेकिन जिस तरह से सिंधिया ने अपने आप को बीजेपी की मूल विचारधारा में ढालने की कोशिश की है, संघ भी उनकी राजनीतिक ताकत को जनता के बीच ले जाने की रणनीति पर विचार कर रहा है। इसमें सावधानी यह बरती जा रही है कि सिंधिया और शिवराज के बीच अहम न टकराए।
हाल ही में ग्वालियर में आयोजित ड्रोन स्कूल के शुभारंभ कार्यक्रम में दोनों की जुगलबंदी दिखी। इस दौरान, सीएम शिवराज ने ड्रोन उड़ाया। उनका ड्रोन लड़खड़ा गया, तो सिंधिया ने कंट्रोल किया। उन्होंने शिवराज के हाथ के रिमोट कंट्रोल को अपने हाथों से ऑपरेट किया और ड्रोन को सुरक्षित उतारा। सिंधिया का इस अंदाज में सीएम को मदद करना चर्चा का विषय बना हुआ है। यही नहीं, जिस वक्त सिंधिया शिवराज को मदद कर रहे थे, उस वक्त वीडी शर्मा भी उन्हें मदद कर रहे थे। इस नजारे को देखने वाले बीजेपी के एक सीनियर लीडर की टिप्पणी- सिंधिया केवल ड्रोन ही नहीं, शिव-राज को भी कंट्रोल कर रहे हैं।
इसलिए गोपनीय रखा था नए डीजीपी का नाम
डीजीपी विवेक जौहरी का कार्यकाल 4 मार्च को समाप्त हो गया, लेकिन अगला डीजीपी कौन होगा? यह सरकार ने गोपनीय रखा था। ‘सरकार’ यह तो तय कर चुकी थी कि पीएमओ में पदस्थ एमपी कैडर के अफसर सुधीर सक्सेना को पुलिस मुखिया की कुर्सी पर बैठाना है, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। एक दिन पहले यानी 3 मार्च को सक्सेना की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापसी का आदेश केंद्र सरकार ने जारी किया। इधर, गृह विभाग ने 4 मार्च को उन्हें डीजीपी नियुक्त करने का आदेश दिया। प्रशासनिक प्रक्रिया में अमूमन इस तरह आनन-फानन में आदेश जारी नहीं होते, लेकिन इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय को भी अंतिम समय में नाम पता चला। दरअसल, ‘सरकार’ कुंडलपुर में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव का समापन होने का इंतजार कर रही थी। इसलिए नए डीजीपी का नाम गोपनीय रखा गया था।

