भारत बना रहा इलेक्ट्रिक हाईवे, दौड़ती गाड़ियां हो जाएंगी चार्ज, दिल्ली-जयपुर हाईवे और यमुना एक्सप्रेसवे पर ट्रायल
नई दिल्ली. भारत ऐसे हाईवेज बना रहा है, जिस पर चलते हुए ही गाड़ियां चार्ज हो जाएंगी। इसकी तस्दीक ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने भी की है। उन्होंने कहा कि सरकार सोलर एनर्जी से चलने वाले इलेक्ट्रिक हाईवेज बनाने पर काम कर रही है। इन हाईवेज पर चलते हुए भारी-भरकम ट्रक और बसें चार्ज हो सकेंगे। वहीं इलेक्ट्रिक हाईवे ऐसे हाईवे होते हैं, जिनमें कुछ इक्विपमेंट्स के जरिए ऐसा सिस्टम होता है, जिससे उनसे गुजरने वाली गाड़ियां बिना रुके ही अपनी बैटरी चार्ज कर सकती हैं। इसके लिए हाईवे पर ओवरहेड वायर या रोड के नीचे से ही इलेक्ट्रिक फ्लो करने का सिस्टम बना होता है। इलेक्ट्रिक हाईवे से केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही चार्ज हो सकती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियां नहीं चार्ज होती। इनसे हाइब्रिड गाड़ियां भी चार्ज हो सकती हैं। हाइब्रिड गाड़ियों में इलेक्ट्रिक के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल से चलने की भी सुविधा होती है। यानी इलेक्ट्रिक हाईवे इलेक्ट्रिक सुविधा से लैस ऐसे हाइवे होते हैं, जहां उनके ऊपर से गुजरती गाड़ियों को चार्ज किया जा सकता है।
ओवरहेड पावर लाइन
इसमें रोड के ऊपर इलेक्ट्रिक वायर लगे होते हैं। जब इन वायर के नीचे से हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक गाड़ियां गुजरती हैं, तो गाड़ियों के ऊपर लगे पैंटोग्राफ इन वायर के संपर्क में आ जाते हैं। इससे करेंट का फ्लो वायर से उस गाड़ी में होने लगता है और उसकी बैटरी चार्ज हो जाती है। जब तक गाड़ी इन तारों के संपर्क में रहती हैं, तब तक उनकी बैटरी चार्ज होती रहती हैं। किसी दूसरी तरफ मुड़ने यानी वायर से संपर्क टूटने के बाद गाड़ी वापस से डीजल या पेट्रोल इंजन मोड में आ जाती है। यानी इलेक्ट्रिक बैटरी की जगह पेट्रोल-डीजल से चलने लगती है। इन हाईवेज से चार्ज इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड गाड़ियां ही होती हैं। हाइब्रिड यानी इलेक्ट्रिक और डीजल-पेट्रोल दोनों से चलने वाली गाड़ियां। इलेक्ट्रिक हाईवे पर इस टेक्नीक से भारी-भरकम ट्रकों या बसों को ही चार्ज किया जा सकता है। इलेक्ट्रिक हाईवेज को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इसमें गाड़ियों के बीच टक्कर होने या बिजली का झटका लगने का डर नहीं रहता है।
ग्राउंड लेवल पावर सप्लाई
इसमें रोड में इलेक्ट्रिक कनेक्शन रोड के अंदर ही फिट किया जाता है। इसमें रोड के नीचे ऐसे रेल या कॉइल लगाए जाते हैं, जिनके जरिए इलेक्ट्रिक का फ्लो हो सकता है। इस टेक्नीक से भी दो तरह से चार्जिंग होती है।
इलेक्ट्रिक रेल
जब इलेक्ट्रिक रोड के ऊपर से गाड़ियां गुजरती हैं, तो गाड़ियों में लगे खास तरह के कॉइल इन रोड में लगे इलेक्ट्रिक रेल या कॉइल के संपर्क में आते हैं, तो उनकी बैटरी चार्ज होने लगती हैं।
वायरलेस चार्जिंग
ये भी ग्राउंड लेवल पावर सप्लाई टेक्नीक है, यानी रोड से चार्जिंग। बस इसमें गाड़ियों को चार्ज करने में वायरलेस चार्जिंग यानी इंडक्टिव चार्जिंग का इस्तेमाल होता है। इस तरह की टेक्नीक में गाड़ियां चार्जिंग के लिए कॉइल की जगह सेंसर के जरिए ही रोड पर लगे चार्जिंग पॉइंट के संपर्क में आने पर चार्ज हो जाती हैं। इसका एक उदाहरण मोबाइल फोन की वायरलेस चार्जिंग है। ग्राउंड लेवल पावर सप्लाई टेक्नीक से न केवल ट्रक और बस बल्कि कार समेत कोई भी गाड़ी चार्ज हो सकती है। खास बात ये है कि ग्राउंड लेवल पावर की टेक्नीक ओवर हेड पावर टेक्नीक से सस्ती होती है।

