निगम अधिकारियों पर नाराज हुए न्यायमूर्ति, सड़क का हाल पता नहीं एसी कक्ष में बैठे रहते हैं, अब आप हमारा आदेश पढियेगा
ग्वालियर. नगरनिगम के अधिकारियों की लापरवाही व अनदेखी के चलते निगमायुक्त को हाईकोर्ट में नाराजगी का सामना करना पड़ा। न्यायमूति मिलिंद रमेश फड़के ने निगम अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए जमकर फटकारा। ग्वालियर के सिथौली रोड स्थित जीएलआर रियल एस्टेट प्रायवेट लिमिटेड की टाउनशिप से जुड़े बाहरी विकास कार्य में हो रही देरी पर न्यायमूर्ति ने कहा निगम ने अगस्त 2021 में शुक्ल वसूला। यह कहते हुए एड़क पानी-सीवर का काम वह करायेंगे। इतना समय बीत गया। लेकिन कुछ भी नहीं किया गया। निगमायुक्त एसी कक्ष में बैठे हुए है। सड़क पर क्या हो रहा है पता नहीं है। जगह-जगह कचरे का ढेर लगा हुआ है। पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। आपको जवाब हमने देख लिया। यह केवल दिखावा है। अब आप हमारा आदेश पढ़ लीजियेगा।
कोर्ट बोला-सीएस को पत्र लिख दिया तो
इस मामले में नगरनिगम ने जवाब पेश करते हुए बताया कि अमृत प्रोजेक्ट के अंतर्गत उक्त क्षेत्र में विकास कार्य कराये जायेंगे। प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर एमआईटीएस भेज दी है। हाईकोर्ट ने दस्तावेज देखे तो पता लगा कि रिपोर्ट 24 अगस्त 2024 को भेजी गयी है। इस तथ्य को भी कोर्ट ने अनदेखा किया। फिर कोर्ट को बताया कि एमआईटीएस के बाद रिपोर्ट को एमआईसी से हरी झंडी मिलने के बाद राज्य शासन के पास भेजा जायेगा। तब जाकर फंड स्वीकृत होगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसा तो आप लोग 3 वर्ष से भी काम पूरा नहीं कर पायेंगे। हाईकोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मुख्य सचिव को पत्र लिख दिया तो आगे आप समझना।
निगम को 67 लाख रुपए विकास कार्य के लिए दिए
दरअसल, शहर के एक बिल्डर ने वार्ड-66 स्थित सिथौली रोड पर टाउनशिप विकसित की है। इसमें एक दर्जन से अधिक परिवार वर्तमान में निवासरत हैं। हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया गया कि अगस्त 2021 में निगम को लगभग 67 लाख रुपए बाहरी विकास कार्य के लिए दिए गए। इसमें निगम को सीवर-पानी-सड़क संबंधी कार्य करवाना था। 3 साल बीतने के बाद भी निगम वहां पर एक भी काम नहीं कर पाया। कोर्ट ने कहा कि जब आपके पास संसाधन नहीं थे, तो फिर शुल्क क्यों वसूला? मामले की सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।

