किसान विरोध का तरीका बदलें व सरकार कृषि कानूनों को होल्ड करने के बारे में सोचे- चीफ जस्टिस
नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का गुरूवार को 22वां दिन है और किसानों को सड़कों से हटाने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की बेंच में आज दोबारा सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार और किसानों दोनों को सलाह दी। सरकार से कहा कि कृषि कानूनों को होल्ड करने की संभावना तलाशें वहीं किसानों को नसीहत दी कि विरोध का तरीका बदलें।
चीफ जस्टिस की 8 बड़ी बातें
हम अभी कृषि कानूनों की वैधता पर फैसला नहीं करेंगे, हम किसानों के प्रदर्शन और नागरिकों के बुनियादी हक से जुड़े मुद्दे पर ही फैसला सुनाएंगे।
हम कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने के बुनियादी हक को मानते है और इसे छीनने का कोई सवाल नहीं उठता। बात सिर्फ यही है कि इससे किसी की जान को खतरा नहीं होना चाहिए।
किसानों को प्रदर्शन का हक है और हम उसमें दखल नहीं देंगे लेकिन प्रदर्शन के तरीकों पर हम गौर करेंगे। हम केंद्र से कहेंगे कि जिस तरह से प्रदर्शन किया जा रहा है उसमें थोड़ी तब्दीली लाएं ताकि इससे आवाजाही करने के नागरिकों के अधिकार पर असर न पड़े।
प्रदर्शन करना तब तक संवैधानिका है जब तक कि उससे किसी की प्रॉपर्टी को नुकसान न पहुंचे या किसी की जान को खतरा न हो।
केंद्र सरकार और किसानों को बातचीत करनी चाहिए। हम इस पर विचार कर रहे है कि एक निष्पक्ष और स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए ताकि दोनों पक्ष उसमें अपनी बात रख सकें।
यह कमेटी जिस फैसले पर पहुंचेगी उसे माना जाना चाहिए तब तक प्रदर्शन जारी रखा जा सकता है। इस कमेटी में पी साईनाथ, भारतीय किसान यूनियन जैसे लोगों का मेंबर बनाया जा सकता है।
दिल्ली को अगर आप ब्लॉक करते है तो शहर के लोगों तक खाने का सामान नहीं पहुंचेगा। बातचीत से आपका मकसदन पूरा हो सकता है। धरने पर बैठे रहने से मदद नहीं मिलेगी।
हम भी भारतीय है और हम किसानों की हालत से वाकिफ है, आपक मकसद से हमदर्दी रखते है। आपको सिर्फ अपने विरोध का तरीका बदलना है और हम भरोसा देते है कि आपकी बात सुनी जाएगी।
केंद्र सरकार इस पर सोचे कि कानून पर फिलहाल रोक लगाने की क्या संभावनाएं है। क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट को यह भरोसा दिला सकती है कि इस मामले की सुनवाई होने तक वह कानून को अमल में नहीं लाएगी।

