एवजी-बाबूओं की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर रहे थे आरटीओ दलाल
इंदौर. तेजाजी नगर पुलिस ने आरटीओ आफिस में दलाली करने वाले जिन एजेंट को गिरफ्तार किया वह फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट से हजारों लाइसेंस रिन्युअल करवा चुके है। आरटीओ के बाबू भी फर्जी प्रमाण पत्र की जानकारी रखते थे। एवजियों से मिली भगत कर वर्षों से फर्जीवाड़ा चल रहा था। पुलिस अब बाबू और एवजियों की भूमिका जांच रही है। तेजाजी नगर पुलिस ने आरोपित अनिल पुत्र आनंद जमगर निवासी सैटेलाइट टाउनशिप बीजलपुर, अमर पुत्र राजकुमार सुनहरे निवासी रविदासपुरा छत्रीपुरा, शरीफ पुत्र अहमद नूर निवासी हरसिद्धी कालोनी, राजू पुत्र केशरसिंह निवासी मुखर्जी नगर, राहुल पुत्र राजेंद्र प्रजापत निवासी हिम्मत नगर पालदा, फिरौज पुत्र मोहम्मद सईद खान निवासी नयागांव हरदा और रोहित पुत्र रमेश कुमार माठे निवासी नेहरु नगर को गिरफ्तार किया था।
आरोपितों ने बताया कि वह आरटीओ के सामने बनी एक इमारत में बैठ पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाते थे। लाइसेंस रिन्युअल के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरुरत होती है। आरोपित डेढ़ सौ से दो सौ रुपये में डाक्टर की सील लगाकर मेडिकल सर्टिफिकेट बना देते थे।
प्रत्येक बाबू के अधीन एवजी, उनके जरिए ही होता है फर्जीवाड़ा
आरोपितों ने बताया कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के बारे में बाबूओं को भी पता था। उनके अधीन काम करने वाले एवजियों के माध्यम से सारा खेल चल रहा था। वर्षों से जमे एक बाबू का करीबी विजय खंडेलवाल, पप्पू तांबे, भैयाजी और बंदू नामक एवजी ही पूरी प्रक्रिया पूरी करता था। एवजी खुद मेडिकल के लिए ग्राहक भेजते है। आरोपित खुद ही नोटशीट लिखते ही और बाबू सिर्फ चिड़िया बैठा देता था। बाद में लाइसेंस तैयार कर एजेंट को सौंप देता था। जानकारी के मुताबिक आरटीओ से रिन्युअल होने वाले करीब 15 हजार 90 प्रतिशत लाइसेंस फर्जी सर्टिफिकेट से रिन्युअल हुए है। बरैग आवेदक से ज्यादा रुपये लेकर एजेंट एवजियों को भी हिस्सा देते है।

