सांसद शेजवलकर, विधायक प्रवीण, पूर्व मेयर इन काउंसिल प्रभारी व कई पार्षदों की नाराजगी के कारण ग्वालियर कमिश्नर संदीप माकिन का मामला भोपाल तक पहुंचा
ग्वालियर. प्रदेश भर के आला अफसरों के सामने ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन की सरेआम छीछालेदर होने का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जोड़तोड़ में माहिर माने जाने वाले संदीप माकिन भले ही भाजपा और कांग्रेस की अदलती-बदलती सरकारों के दौर में भी अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब होते रहे लेकिन उनके तौर-तरीकों के कारण पैदा हुआ चौतरफा आक्रोश आखिर में उन्हें ले डूबा।
चौतरफा लूट-खसोट और खुली मनमानी के कारण खामियाजा अब सामने आया
नगर सरकार में प्रशासनिक मुखिया के तौर पर संदीप माकिन का पूरा कार्यकाल कभी किसी भी नवाचार के लिए याद नहीं किया जाएगा। दरअसल निगमायुक्त के तौर पर उन्होंने यहां जनता की सुनवाई और निगम की भलाई से लेकर शहर सरोकार के मुद्दों तक किसी तरह का कोई नवाचार नहीं किया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले निगम में बतौर कमिश्नर पदस्थ हुए कई अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान न केवल कुछ नया करने के लिए चर्चाओं में रहे बल्कि बदली व्यवस्थाओं और नए तौर-तरीकों के लिए आगे भी याद किए जाएंगे। निगमायुक्त के पद से उनकी इस तरह बेइज्जत विदाई को लेकर तमाम तरह की चर्चाओं का दौर गरम है। माना जा रहा है कि इस पूरे एपीसोड से पीछे असल कारण लंबे समय से जनता की अनसुनी और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी किया जाना है। एक तरफ निगम में मची चौतरफा लूट-खसोट और खुली मनमानी के कारण निरंतर अराजकता का माहौल बनते रहना तो दूसरी ओर शहर सरोकार के मामलों में सांसद, विधायकों से लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों की अनदेखी किए जाने का खामियाजा अब सामने है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उनको सरेआम फटकार लगाते हुए पद से हटाया जाना अपने आप में बड़ी घटना है।
कैसे ये मामला भोपाल पहुंचा
जानकारी के अनुसार सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, विधायक प्रवीण पाठक और पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल से लेकर पूर्व मेयर इन काउंसिल प्रभारी एवं कई पार्षदों की नाराजगी के चलते मामला भोपाल तक पहुंचा।

