त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के साथ संपन्न
ग्वालियर-जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला में आयोजित त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शनिवार 19 अक्टूबर को ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के साथ संपन्न हुआ। ज्ञात हो की 17, 18 एवं 19 अक्टूबर 2024 को विभाग में “भारत आधुनिकता एवं परंपरा का संगम” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया था जिसमें की 2 दिवसीय शोध पत्र वाचन के पश्चात तीसरे दिन शोधार्थियों को ग्वालियर के आसपास स्थित ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करवाया गया।
भ्रमण के दौरान अन्य राज्यों से पधारे अतिथि विद्वानों ,शोधार्थी एवं विद्वतजनों ने ग्वालियर के इन विरासत विरासत स्थलों के काल की प्रशंसा की। पुरातत्व विभाग के प्रतिनिधियों द्वारा आगंतुक शोधार्थियों को उपरोक्त स्थलों के इतिहास एवं क्षेत्रीय संस्कृति में उनके योगदान से अवगत कराया।
मुरैना जिले में स्थित प्रतिहार एवं कच्छपघात कालीन पुरास्थलों यथा मितावली, पदावली, बटेश्वर मंदिर समूह का भ्रमण कराया गया। विद्वानों ने जाना कि कैसे यह क्षेत्र आज से सहस्रो वर्ष पूर्व शाक्त परंपरा की तपस्थली रही है। साथ ही पदावली में स्थित भग्न मंदिरावशेषों को देखकर इस क्षेत्र के स्थानीय कच्छपघात कला की उन्नत अवस्था के दर्शन भी अतिथि जनों ने किया। बटेश्वर मंदिर समूह में जाकर उन्हें एक अलग ही अनुभव की प्राप्ति होती है जो कि उस स्थल के धार्मिक वातावरण के कारण ही संभव है। भ्रमण में सेंट जेवियर कॉलेज मुंबई के इतिहास विभाग के विभाग अध्यक्ष के अनुसार यह स्थल विश्व के पर्यटकों को अपनी ओर खींच के लाने की योग्यता रखते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी पुरातात्विक धरोहरों से पता हुआ कि यह क्षेत्र सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक रूप से अवश्य ही प्राचीन काल से आज तक फल फूल रहा है।सभी प्रतिभागियों ने ग्वालियर की मंदिर स्थापत्य एवं कला को निहार कर बहुत ही अभिभूत हुए और उन्हें मंदिर स्थापत्य और कला की मुक्त कंठ से प्रशंसा की l इसके लिए सभी ने जीवाजी विश्वविद्यालय के आयोजन सचिव प्रो शान्तिदेव सिसोदिया का धन्यवाद दिया।

