चंबल में जन आशीर्वाद यात्रा का विरोध
ग्वालियर. विधानसभा चुनाव से पहले जनता का आशीर्वाद लेने और नब्ज टटोलने भाजपा ने प्रदेश के पांच स्थानों से जन आशीर्वाद यात्रा आरंभ की है। इनका जाहिर उद्देश्य प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना है ताकि नवंबर में जनता का वोट रूपी आशीर्वाद मिले लेकिन ग्वालियर-चंबल में श्योपुर से आरंभ हुई इस यात्रा की शुरुआत ही बिगड़ गई। पांच सितंबर को शुभारंभ के अवसर पर श्योपुर में इतनी वर्षा हुई कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके। तब ग्वालियर एयरपोर्ट से अमित शाह ने मोबाइल से सभा को संबोधित किया।
मुरैना में यात्रा का विरोध
अगले दिन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और सिंधिया ने यात्रा की कमान संभाली। बुधवार को इस यात्रा का अगला पड़ाव मुरैना जिले का सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र था। यहां यात्रा का विरोध हो गया। दरअसल, पार्टी ने यहां से सरला रावत का नाम पहली सूची में घोषित कर दिया है। भाजपा के कुछ स्थानीय कार्यकर्ता और सिंधिया के साथ पार्टी में आए कई नेता इस नाम के विरोध में उतर आए हैं। इसी की परिणिति विरोध के रूप में दिखी।
भाजपा नेता विरोध को शांत करने में पूरी ताकत लगा रहे
इस यात्रा को बुधवार की रात श्योपुर से सबलगढ़ में प्रवेश करना था। शाम को कस्बे की सड़कों पर यात्रा का विरोध शुरू हो गया। इस वजह से यात्रा को काफी देर तक श्योपुर के ओछापुरा, वीरपुर और टेटरा में रोके रखा। सबलगढ़ की सभा में तोमर और सिंधिया दोनों को शामिल होना था लेकिन विरोध के चलते सिंधिया सबलगढ़ पहुंचने से पूर्व ही ग्वालियर रवाना हो गए। लगभग आधी रात को सभा की औपचारिकता हुई। इस विरोध ने भाजपा नेताओं को हैरत में डाल दिया है। गुरुवार को मुरैना में यात्रा का ठहराव है, ऐसे में भाजपा नेता सबलगढ़ में उठे विरोध को शांत करने में पूरी ताकत लगा रहे हैं ताकि मुरैना के पोरसा में शनिवार (नौ सितंबर) को जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इसमें शामिल होने पहुंचे तब पार्टी एकजुट दिखाई दे।

