केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर के खिलाफ खात्मा रिपोर्ट पर फरियादी ने पेश किए साक्ष्य
ग्वालियर.विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट महेंद्र सैनी ने शुक्रवार को पड़ाव पुलिस थाने की उस खात्मा रिपोर्ट पर सुनवाई की, जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को कोविड-19 की गाइड लाइन के उल्लंघन के मामले में खात्मा रिपोर्ट पेश की थी। फरियादी ने 160 पेज के साक्ष्य न्यायालय में पेश किए हैं। फोटो व वीडियो भी पेश किए। फरियादी की ओर से तर्क दिया गया कि कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक व एसडीएम ने हाई कोर्ट में शपथ पत्र स्वीकार किया था, जिसमें उन्होंने कोविड-19 की गाइड लाइन के उल्लंघन के बारे में बताया। 5 अक्टूबर 2020 को केंद्रीय मंत्री ने सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच कार्यालय का शुभारंभ भी किया और भीड़ जुटाकर सभा भी की, लेकिन पुलिस ने तथ्यों को ध्यान में रखा और खात्मा रिपोर्ट पेश की है। कोर्ट ने इन साक्ष्यों को रिकार्ड पर लेते हुए 28 जनवरी को फरियादी आशीष प्रताप सिंह को बुलाया है। साथ ही खात्मा रिपोर्ट की कापी दिए जाने के लिए आवेदन लगाने को कहा।
अक्टूबर 2020 में ग्वालियर चंबल संभाग में विधानसभा का उपचुनाव कराया गया था। जब चुनाव कराए गए थे, तब कोविड-19 का संक्रमण तेजी से फैल रहा था। उपचुनाव में राजनेता हजारों की भीड़ इकट्ठा करके रैलियां कर रहे थे। जिससे कोविड-19 का संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया था। संक्रमण भी तेजी से बढ़ रहा था। इसको लेकर अाशीष प्रताप सिंह ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने सभाओं पर रोक लगाते हुए अादेश दिया था कि जो राजनैता कोविड-19 का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाए। हाई कोर्ट के अादेश के बाद अंचल के अलग-अलग थानों में 46 एफआइआर दर्ज की गई थीं। हाई कोर्ट का आदेश के आने के बाद आशीष प्रताप सिंह की शिकायत पर पड़ाव थाना पुलिस ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ 23 अक्टूबर 2020 को धारा 188 व आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 बी के तहत केस दर्ज किया था। जून 2022 में पड़ाव पुलिस ने नरेंद्र सिंह तोमर को क्लीन चिट देते हुए खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी। इस खात्मा रिपोर्ट पर फैसले से पहले फरियादी आशीष प्रताप सिंह के गवाही होनी है। आशीष प्रताप सिंह ने कोविड-19 की गाइड लाइन के उल्लंघन के संबंध में साक्ष्य, फोटो, वीडियो पेश किए हैं। साथ ही हाई कोर्ट में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम के शपथ पत्र भी पेश किए गए हैं। जिसमें गाइड लाइन के उल्लंघन के संबंध में हाई कोर्ट में जानकारी दी थी।

