हमले का बजा सायरन, सिर्फ 1 मिनट का वक्त और जिन्दगी या मौत, हमले के बीच जीवन जीने के आदी हो गये हैं लोग
नई दिल्ली. हम एक होटल के बम शेल्टर में पहुंचे, जहां पहले से कई परिवारों ने शरण ले रखी थी। इनमें से कई लोग स्थानीय थे और उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझाया। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा है कि हवाई हमले के सायरन से रॉकेट के टकराने तक का समय एक मिनट से भी कम होता है। यही कारण है कि सायरन सुनते ही शेल्टर में दौड़ना बहुत अहम है। इस निर्णय में जरा भी देरी जीवन को मौत में बदल सकती है और या फिर कम से कम आपके अंगभंग कर आपको विकलांग बनी सकती है।
पिछले साल 7 अक्टूबर को जब से हमास ने इजरायल पर हमला बोला, तबको ही इजरायल की लगातार अपने दुश्मनों के साथ जंग जारी है। आलम यह है कि इस जंग से गाजा अब भूतिया शहर में तब्दील हो चुका है। लेबनान के भी कई इलाके खंडहर में बदल चुके है। तो वहीं इजरायल के हाइफा शहर में भी लोग डर के साये में जी रहे है। हाइफा में क्या हाल है और लोगों ने सायरन को कैसे अपनी जिन्दगी का अहम हिस्सा मान लिया है।
सायरन बजते ही अफरा-तफरी
इस दौरान इजरायल के हाइफा शहर में सोमवार को अचानक हवाई हमले का सायरन बजते ही चारों और अफरा-तफरी मच गयी। लोग अपने-अपने घरों और होटलों में निकलकर तेजी से बम शेल्टरों की तरफ दौड़ पड़े। शहर के हर कोने में खतरे की घंटी बज रही थी और लोग जान बचाने के लिये जितनी जल्दी हो सके। बम शेल्टरों में शरण लेने के लिये भाग रहे थे।
डर से मुरझा गये थे बच्चे और बड़े भी घबराये
शेल्टर में मौजूद लोगों में कुछ तो बच्चों के साथ थे, जो इस भयावर्ह िस्थति में सहमे हुए थे। माता-पिता अपने बच्चों को दिलासा देने की कोशिश कर रहे थें लेकिन डर की लकीरें हर किसी के चेहरे पर साफ झलक रही थी। एक और शख्स ने हिदायती लहजे में कहा है कि इस हमले के दौरान हमारी प्राथमिकता सुरक्षित स्थान तक पहुंचना है। हम जानते हैं कि अगर हम शेल्टर तक नहीं पहुंचे तो हमारा सामना सीधे रॉकेट से हो सकता है।
ऐसा आपात स्थिति के आदी हो गए हैं हाइफा के लोग
शहर में ऐसी स्थिति पहले भी कई बार देखी जा चुकी है, और इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हाइफ़ा के निवासी और पर्यटक दोनों ही अब इस प्रकार की आपात स्थितियों के आदी हो चुके हैं और काफी हद तक तेज भी। अधिकतर सार्वजनिक और निजी स्थानों पर बम शेल्टर की सुविधाएं हैं, और लोग अक्सर यह जानने की कोशिश करते हैं कि वे किस स्थान पर शरण ले सकते हैं। सायरन बजते ही लोग एक तेज दौड़ लगाते देखे जा सकते हैं जो कि देखकर लगता है कि जैसे ये उनकी आदत में शुमार हो।

