सिंधिया समर्थकों के शब्दों से सरकार और संगठन दोनों असहज
ग्वालियर. भाजपा की अपनी कार्यशैली है। पार्टी के गाइडलाइन पर शीर्ष नेता से लेकर कार्यकर्ता तक बाध्य होते हैं। पार्टी नेता भी संगठन की नीतियों व सिद्घांतों को ध्यान में रखते हुये बोलते हैं। अमूमन नेता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के शब्दों से सरकार व संगठन दोनों असहज हो जाते हैं। अंचल में पूर्व मंत्री इमरती देवी के बयानों से संगठन व सरकार दोनों निरुत्तर हो जाते हैं। चुनावी बेला में सड़कों को लेकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की पादुकाएं उतारने को लेकर सरकार व संगठन दोनों नाराज हैं। शराब बंदी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पहले से मुखर हैं। इस मुद्दे को लेकर सरकार व संगठन व दोनों खामोश हैं। अब ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शराब बंदी पर बोलकर इस मुद्दे को फिर से हवा दे दी है।
इमरती देवी की सहजता का सरकार व संगठन के पास कोई जवाब नहीं होता है कांग्रेस संस्कृति से आईं पूर्व मंत्री इमरती देवी भी सहजता के साथ ऐसा कुछ बोल जाती है कि सरकार व संगठन के पास इसका कोई जवाब नहीं होता है। किंतु उनके बयान मीडिया की सुर्खिया बन जाते हैं। उपचुनाव से लेकर कई बार उनके बयान पार्टी के गाइड लाइन के विपरीत बयान प्रदेश नेतृत्व को दुविधा में डाल देते हैं। संगठन के नेता इसे भोलेपन में दिया बयान बताकर किनारा कर लेते हैं।

