फर्जी मार्कशीट गिरोह का सरगना गिरफ्तार, ऑफिस में बैठकर बनाता था देश के किसी भी बोर्ड की 10वीं-12वीं समेत नामी यूनिवर्सिटीज की फर्जी मार्कशीट
इंदौर. पुलिस ने फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है, इस मामले मे तिलक नगर स्थित सहर्ष इंस्टीट्यूट ऑफ आईटी मैनेजमेंट के संचालक सतीशी गोस्वामी को गिरफ्तार किया है। सतीश एजुकेशन इंस्टी्यूट की आड़ में फर्जी मार्कशीट बनाने का काम कर रहा था। वह 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन समेत अन्य डिग्रियों की फर्जी मार्कशीट बनाता था। करीब 4 साल में उसने 554 फर्जी सर्टिफिकेट बनाए है, इनसे डेढ़ करोड़ कमाए हैं। एएसपी गुरूप्रसाद पाराशर ने बताया कि क्राइम ब्रांच को फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह की सूचना मिली थी इसके बाद तिलक नगर इलाके में सहर्ष इंस्टीट्यूट ऑफ आईटी मैनेजमेंट पर छापा मारा। यहां से संचालक सतीशी गोस्वामी को पकड़ा। तलाशी में पता चला कि वह एक सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी मार्कशीट बनाने का काम करता था।
10वीं, 12वीं समेत देशभर के बोर्ड की फर्जी मार्कशीट
पूछताछ में पता चला कि सतीश 10वीं,12वीं, ग्रेजुएशन की फर्जी मार्कशीट बनाता था। वह महाराष्ट्र बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन, राजस्थान बोर्ड, विलियम कैरी यूनिवर्सिटी, मेवाड़ यूनिवर्सिटी, सनराईज यूनिविर्सटी, शंघाई यूनिविर्सटी, डीआरसीबी रमन यूनिवर्सिटी, ओपीजीएस यूनिवर्सिटी, एसआरके यूनिवर्सिटी, आईसेक्ट यूनिवर्सिटी, आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी आदि के फर्जी सर्टिफिकेट बनाता था।
ऐसे चलाता था गिरोह
सतीश ने इसके लिए बाकायदा ऑफिस खोल रखा था। कोई छात्र उसके यहां एडमिशन लेने आता या डिग्री, डिप्लोमा करने की बात कहता, तो वह उसे झांसे में लेकर सिर्फ मार्कशीट दे देता था इसके एवज में वह मोटी रकम वसूलता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट बनाने के लिए 10 से 15 हजार रुपए लेता था। इसके अलावा ग्रेजुएशन और अन्य मार्कशीट बनाने के लिए भी रुपए तय थे। ग्रेजुएशन की मार्कशीट के लिए 15 हजार रुपए लेता था। मध्यप्रदेश बोर्ड और यूनिविर्सटी के ज्यादा पैसे वसूलता था।
ये सामान जब्त किया
सतीश के यहां से 7 कम्प्यूटर, 2 प्रिंटर, दो मोबाइल और दो रजिस्टर जब्त किए गए हैं। 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन की 50 मार्कशीट जब्त की हैं। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है कि उसने किन-किन लोगों को मार्कशीट बनाकर दी है, इसका पता लगाया जा रहा है। उसके साथियों व संस्था से जुड़े लोगों की जानकारी हासिल की जा रही है साथ ही इतनी मार्कशीट का उपयोग किस तरह के कामों में किया गया है, इसे लेकर भी पूछताछ की जा रही है।

