पुरातत्व विभाग में मनाया गया हिन्दी एवं विश्वकृतज्ञता दिवस
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस एवं कृतज्ञता दिवस के अवसर पर 21 सितंबर को इतिहास एवं पुरातत्व विभाग मैं रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें अर्थशास्त्र, इतिहास एवं पुरातत्व, मनोविज्ञान के छात्र- छात्राओं ने पोस्टर, स्लोगन, श्रुत लेखन व नाट्य विधाओं द्वारा हिंदी की सार्थकता एवं उपयोगिता को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु माननीय प्रो. अविनाश तिवारी ने की एवं मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. बीके श्रीवास्तव सागर विश्वविद्यालय, प्रोफेसर हेमंत शर्मा एवं विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर एसडी सिसोदिया उपस्थित थे।
छात्र-छात्राओं द्वारा हिंदी की उपयोगिता को अपने जीवन से जोड़ने के प्रण के साथ-साथ अनेक विधाओं द्वारा हिंदी की अलौकिकता पर प्रकाश डाला। अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलगुरु प्रोफेसर तिवारी ने हिंदी की मौलिकता के स्वरूप का विश्लेषण करते हुए हिंदी की प्रासंगिकता को उजागर किया, तथा गुरु शिष्य परंपरा को बनाए रखने पर जोर दिया, नमस्कार शब्द के लिए सब को उत्साहित किया। वहीं मुख्य अतिथि डॉक्टर श्रीवास्तव ने हिंदी के ऐतिहासिक दृष्टिकोण को विस्तृत स्वरूप दिया। प्रोफेसर डॉक्टर एसडी सिसोदिया ने विभाग द्वारा हिंदी के अधिकतम उपयोग का वचन देते हुए छात्र-छात्राओं को पुस्तकालय में हिंदी पुस्तकों के वाचन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में पोस्टर, स्लोगन एवं नुक्कड़ नाटक में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र वितरित कर छात्र/छात्रायों को प्रोत्साहित किया गया । आभार व्यक्त डॉक्टर जयंती ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से डॉ शिबकुमारी, डॉ कृतिका, डॉ याशी, दिव्या, डॉ गंगोत्री, आरती, डॉ सिल्की, डॉ प्रीति, ज्योति, डॉ दीपा आदि आदि उपस्थित थे।

