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अदम्य साहस और वीरता का पर्याय है कारगिल विजय – ब्रिगेडियर झाला

ग्वालियर – कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ रजत जयंती समारोह महाराज बाड़ा ग्वालियर पर आयोजित किया गया। सर्वप्रथम तिरंगा हाथ में लेकर उपस्थित आर्मी के जवान एनसीसी के क्रेडिट और स्कूल छात्रों ने बैंड बाजे के साथ शौर्य यात्रा पूरे महाराज बड़ा क्षेत्र में घुमाई। इसके पश्चात शहीदों को सलूट करने का कार्यक्रम शुरू हुआ।
कार्यक्रम में प्रथम पुष्प चक्र गौशाला लाल टिपारा के संत ऋषभदेवानंद जीने अर्पित किया उसके बाद क्रमशः पुष्प चक्र भारत पैट्रोलियम के सेल्स ऑफिसर पवन मीना , लेफ्टिनेंट कर्नल सारांश , जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल नरेंद्र सिंह तोमर , पुलिस लाइन सूबेदार प्रेम सिंह राठौड़, पूर्व साडॉ अध्यक्ष राकेश जादौन, ASP निरंजन शर्मा, एसडीएम विनोद सिंह , मुख्यालय मुरार से मेजर अनमोल सिंह विहवल सेंगर, ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर और सशस्त्र सैनय सलामी ब्रिगेडियर केडीएस झाला ने 527 शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर सलाम किया।
सन् 1999 कारगिल युद्ध का इतिहास अगर हम देखें वहां का भूभाग गहरी गहरी खाईयो वाला और उन खाइयों के बीचऊँची ऊँची बर्फ से ढ़की पहाड़ियां । शत्रु ऊपर और हमारी सेना नीचे । दुश्मन तक पहुंचने का कोई भी रास्ता नहीं , इसके बाबजूद हमारे वीर योद्धा शत्रु तक पहुंचे भी ओर उनकी गर्दन को भी मरोड़ा । तब सारे विश्व ने हमारी सेना के पराक्रम को जाना, हमारी सेना वीरता का पर्याय बनी। उक्त उदगार ब्रिगेडियर केडीएस झाला जी ने कारगिल शहीद सरमन सिंह खेल एवं शिक्षा प्रसार  संस्था एवं नगर निगम ग्वालियर के संयुक्त तत्वाधान में अयोजित कारगिल विजय दिवस समारोह में व्यक्त किये। ब्रिगेडियर केडीएस झाला जी ने कहा हमारी सेना के कारण कोई भी देश हमारी तरफ आँख उठाने का साहस नही कर पाता है। हमारे ग्वालियरवासियों के लिए बड़े ही गर्व की बात है कि सेकंड राज रिफ सेक्शन लीडर हवलदार सरमन सिंह व उनके साथियों ने विषम परिस्थितियों में जहां सांस लेने में भी दिक्कत है माइनस डिग्री में टेंपरेचर है ऐसी विषम परिस्थितियों में हमारे रणबांकुरे ने विजय श्री दिलाई।
28 जून की दरमियानी रात हवलदार सरमन सिंह (सेना मेडल) का टाइगर हिल पर तिरंगा फहराते हुए बलिदानी पथ पर चले गए मैं ग्वालियर वासियो को बताना चाहता हूं कि कारगिल शहीद सरमन सिंह खेल एवं शिक्षा प्रसार संस्था ने  कारगिल युद्ध के 527 शहीदों की स्मृति में देश के तीसरे नंबर का स्मारक कारगिल युद्ध शौर्य स्मारक शहीद सरमन सिंह पार्क ग्वालियर में बनाकर तैयार किया है 1- पहले नंबर का स्मारक  कारगिल के  द्रास सेक्टर में बना हुआ है जहां यह लड़ाई लड़ी गई,,2- दूसरे नंबर का स्मारक शुकताल, मुजफ्फरनगर ,उत्तर प्रदेश में बना हुआ है गंगा नदी के किनारे , 3- तीसरे नंबर का स्मारक ग्वालियर में कारगिल युद्ध शौर्य स्मारक के नाम से शहीद सरमन सिंह पार्क बहोड़ापुरथाने के बगल से बना हुआ है में कारगिल शहीद सरमन सिंह संस्था को इस कार्य के लिए हृदय से धन्यवाद देता हूँ और मुझे विश्वास है कि यह स्मारक आने वाली पीड़ियों के लिए देशभक्ति की भावना को जागृत करेगा  मैं यहां इस कार्यक्रम में सभी अधिकारियों व  एनसीसी कैडेट्स स्कूली छात्र-छात्राएं भूतपूर्व सैनिकों उपस्थित जन समुदाय से ये आवाहन करता हूं एक बार उस स्मारक पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने अवश्य जाएं और उस स्मारक का अवलोकन करें। इन्हीं शब्दों के साथ में अपनी वाणी को विराम देता हूं जय हिंद इसके बाद वीर नारी श्रीमती सरोज कुमारी जिनके पति हवलदार सरमन सिंह सेना मेडल ने 1999 के कारगिल युद्ध में अपना बलिदान दिया आर्मी के सभी अधिकारियों ने सम्मानित किया।

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