TET सहित 3 मांगों के लिये बनेगा संयुक्त मोर्चा, 1.5 लाख शिक्षक सामूहिक बैठक में बनायेंगे आंदोलन की रणनीति
भोपाल. मध्यप्रदेश में टीईटी परीक्षा को लेकर विवाद दिनों -दिन बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर टीचर्स विरोधका रास्ता अपनाने की तैयारी में है। वह इसके लिये रणनीति बना रहे हैं। कल यानी 29 मार्च को प्रदेशभर के शिक्षकों की सामूहिक बैठक होने जा रही है।
दरअसल, लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) भोपाल के आदेश अनुसार ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 6 वर्ष से अधिक समय बचा है। उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उठाया जा रहा है। आदेश मेें स्पष्ट किया गया है। संबंधित शिक्षकों को आदेश जारी होने की तारीख से 2 वर्ष के अन्दर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। अगर कोई शिक्षक तय समय -सीमा में टीईटी पास करता है तो उसे सेवा से हटाया जा सकता है।
31 मार्च तक मांगी शिक्षकों की जानकारी
लोक शिक्षण संचालनालय ने 9 मार्च को सभी जिलों से ऐसे प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की जानकारी मांगी है। जिन्होंने टीईटी परीक्षा पास नहीं की है। इसको लेकर जारी नये आदेश के अनुसार यह जानकारी 31 मार्च तक देने के निर्देश दिये गये है। यहीं विवाद की वजह बना हुआ है। क्योंकि इस दायरे में वह शिक्षक भी आ रहे है। जो 2005 और 2008 की भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए थे। उस वक्त लागू नियमों के अनुसार पात्र थे। अब नये नियम लागू होने की आशंका ने पूरे शिक्षा तंत्र में असंतोष पैदा कर दिया है।
शिक्षक बोले- आगे की लड़ाई एक साथ लड़ेंगे
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 29 मार्च को सभी शिक्षक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई है। इस बैठक में संयुक्त शिक्षक मोर्चा बनाया जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी। टीईटी के अलावा “शिक्षक एप से अटेंडेंस” और “सेवा वृद्धि” जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे। इस बैठक में ही शिक्षक आगे आंदोलन का प्लान तैयार करेंगे। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया आरटीई एक्ट 2009 साल 2010 से लागू हुआ और टीईटी 2011 से अनिवार्य हुआ, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे।

