पति-पत्नी के बीच अननेचुरल सेक्स अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने आंशिक FIR निरस्त की, दहेज-मारपीट प्रताड़ना के आरोपों ट्रायल जारी रहेगी
ग्वालियर. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा है कि वैवाहिक संबंध के दौरान पति-पत्नी के बीच हुए यौन संबंधों को आईपीसी की धारा 377 के तहत अपरोध नहीं माना जा सकता है। पति-पत्नी के बीच अननेचुरल सेक्स अपराध नहीं है। पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दहेज, मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों पर मुकदमा जारी रहेगा। भिंड में 2023 में पत्नी ने पति पर रहेज न मिलने पर अननेचुरहल सेक्स का आरोप लगाकर पति के खिलाफ महिला थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ता पति ने ग्वालियर हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि केवल सामान्य आरोप लगाये गये हैं। जिनमें कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने केस निरस्त कर दिया है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 375-377 की व्याख्या करते हुए कहा है कि संशोधित कानून के तहत कई यौन कृत्य की परिभाषा में आते है। लेकिन वैवाहिक संबंधों के भीतर पति-पत्नी के बीच हुए यौन संबंध आदि पत्नी नाबालिग नहीं है तो उन्हें धारा 377 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता है।
अन्य आरोपों पर जारी रहेगा ट्रायल
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज मांग, मारपीट और प्रताड़ना जैसे आरोपों की सुनवाई जारी रहेगी। इन धाराओं में दर्ज FIR को निरस्त नहीं किया गया है। यह फैसला वैवाहिक संबंधों और आपराधिक कानून की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने अलग-अलग धाराओं के दायरे को स्पष्ट किया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शादी के समय ससुराल वालों को 4 लाख रुपए कैश, सोने के गहने और घरेलू सामान दिए गए थे। इसके बावजूद ससुराल वाले 10 लाख रुपए और बुलेट की मांग करते रहे। मांग पूरी नहीं करने पर प्रताड़ित किया गया। मारपीट की गई। शिकायत में महिला ने अपने पति पर जबरन आप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप भी लगाया। उसका कहना था कि दहेज की मांग पूरी न होने पर पति उसके साथ जबरदस्ती करता था, जिससे उसे शारीरिक और मानसिक परेशानी होती थी। ससुर पर भी गलत व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे।

