एक हजार वर्ष पुराने विष्ण मंदिर के अवशेष मिले शनिचरा पहाडी पर, दो चरणों में जीर्णोद्वार का कार्य होगा शुरू
ग्वालियर. मुरैना के ऐंती गांव स्थित शनिचरा पवर्त पर शनि मंदिर से कुछ दूरी पर 12 वर्ष पूर्व एक विशाल व भव्य विष्णु मंदिर के अधिष्ठान भाग से लेकर शिखर तक के भग्नावेश यहां बिखरे पड़े थे। जिन्हें जोड़कर मंदिर को फिर खड़ा किया जा सकता था। 12 वर्ष पहले पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग भोपाल को मंदिर के संरक्षण का प्रस्ताव भेजा गया था। इस प्रस्ताव पर इस मंदिर के संरक्षण का शुरू किया जा रहा है। इसके अलावा भिण्डज्ञ के भी 4 पुरा स्मारकों के जीर्णोद्वार का काम 2चरणों में किया जायेगा। इस लगभग 2 करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे। पहले चरण का काम 2 माह में पूरा किया जायेगा इसके बाद जीर्णोद्वार का दूसरा चरण शुरू होगा।
ऐंती गांव के शनिचरा पहाड़ी स्थित टीले का सर्वे वर्ष 2012 में किया गया था। सर्वे में विशेषज्ञों ने इसे कच्छप घात कालीन मंदिर पाया था। मंदिर के भग्नावशेष 10वीं शताब्दी के आंके गये थे। तत्कालीन वरिष्ठ मार्गदर्शक रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर के डॉ. रमेशकुमार यादव ने निरीक्षण के बाद बताया था कि मंदिर का अधिष्ठान भाग (वेदीबंद) साबुत है। इसके तल पर गर्भगृह, मण्डल एवं मुख्य मंडप मौजूद है। मंदिर का निर्माणकाल 10वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध का है। मंदिर कच्छपघात शैली (गोपाद्रि शैली) का है। इसके आसपास प्रतिहार शैली का एक कुण्ड और एक अन्य मंदिर के अवशेष भी है। मंदिर का शिखर टूटा है, रथर पर विराजे हैं विष्णु वर्तमान में मंदिर के अधिष्ठान, कुंभ कलश, कणिका, खुरक, अंतर पट्टिका एवं कपोतिका भाग साबुत हैं। ऊपर का मंडोवर एवं शिखर भाग टूट चुका है लेकिन इसके अवशेष आसपास ही बिखरे हुए हैं। अधिष्टान के कुंभ भाग (निचले भाग) पर मूर्तियां बनी है। मुख्य रथ पर बांयी ओर विष्णु, दांयी तरफ गणेश की आकृति है। उत्तरी भाग में ब्रम्हा एवं कार्तिकेय की मूर्तियां ललितासन में अंकित है। दक्षिणी भाग क्षतिग्रस्त है।
कैसे संवारेंगे मंदिर
मंदिर एक टीले के रूप में बदल चुका है और इसके भग्नावशेष दूर तक बिखर गये है। इस मंदिर के भग्नावशेषों को कैमीकल से साफ किया जायेगा। यहां से घास, पौधे, मिट्टी आदि हटाये जायेंगे। यह काम 2 माह में होगा। इसके बाद अगले चरण में भग्नावशेषों को जोड़ने का काम होगा। मुरैना में यहकाम 16.53 लाख रूपये से होगा। इसके अलावा भिण्ड किले को 78.45 लाख, गोहद किले को 75.39 लाख और भिण्ड के डांग स्थित शिवमंदिर को 7.57 लाख रूपये, शिव व देवी मंदिर सीताराम की लावन का जीर्णोद्वार 28.98 लाख रूपये से किया जायेगा।
विशेषज्ञों की राय
वह मंदिर 10वीं से 13वीं सदी का है, शनिचरा इलाके में नागर शैली, कच्छपघात शैली और प्रतिहारा शैली के मंदिर पाये जाते हैं। यहां पर सर्वाधिक मंदिर मिलने की वजह है कि यह जगह शिल्पकारों की प्रशिक्षण स्थली थी। प्रशिक्षार्थी हर शैली के मंदिर बनाना सीखते थे। यह मंदिर पुराने स्वरूप में लौटता है तो बहुत ही भव्य नजर आयेगा।
प्रथम चरण में जीर्णोद्वार
ऐंती विष्णु मंदिर के जीर्णोद्वार का पहला चरण जल्दी शुरू हो जायेगा। यहां बहुत भव्य मंदिर के भाग्नावशेष मिले हैं। इसके टेण्डर जारी हो चुके हैं।
पीसी महोबिया, उपसंचालक, पुरातत्व, अभिलेखागार, नॉर्थजोन, ग्वालियर
