भारतीय परंपरा एवं आधुनिकता संगोष्ठी का समापन -जो लोग राह भटक गए हैं उन्हें सही राह दिखाना है- डॉ.वाडीनागल पन्नालोक
किसी देश,समाज के निर्माण में उसकी परंपरा का बहुत बड़ा योगदान होता है- प्रो. अविनाश तिवारी
ग्वालियर।परंपरा और आधुनिकता के बीच का संबंध एक महत्वपूर्ण आयाम के रूप में उभरता है। परंपरागत रूप से, आधुनिकता को परंपरा के विपरीत रूप में देखा जाता है, जो अविकसित समाजों को पारंपरिक और विकसित समाजों को आधुनिक के रूप में दर्शाता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, आधुनिकीकरण का तात्पर्य एक पूर्व निर्धारित अनुसरण करते हुए परंपरा से आधुनिकता की ओर बदलाव है। सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ने भारतीय समाज की विविधता को समृद्ध किया है।बौद्ध धर्म में, बुद्ध उस व्यक्ति को कहते हैं जिसने ज्ञान, निर्वाण और बुद्धत्व प्राप्त कर लिया हो तथा चार आर्य सत्यों को समझ लिया हो। प्रायः ‘बुद्ध’ शब्द से महात्मा बुद्ध का बोध होता है। बुद्ध शब्द का शाब्दिक अर्थ है, ‘प्रबुद्ध व्यक्ति’ या ‘ज्ञाता’। बौद्ध धर्म में, बुद्ध, धम्म, और संघ को त्रिरत्न कहा जाता है। बौद्ध धर्म सिखाता है कि हम सभी गलत धारणाओं और भ्रमों से घिरे रहते हैं. बुद्ध वह व्यक्ति है जो इन भ्रमों से मुक्त हो गया है।यह बात शुक्रवार को श्रीलंका से आए डॉ. वाडीनागल पन्नालोक ने जेयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययन शाला व मुंबई स्थित काश फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय परंपरा एवं आधुनिकता का संगम संगोष्ठी के समापन सत्र में बतौर बीज वक्ता कही।अतिथि के रूप में काश फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. अवकाश जाधव उपस्थित रहे। वहीं अध्यक्षता जेयू के कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी ने की।
सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।इसी क्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. अवकाश जाधव ने कहा कि भारतीय आधुनिकीकरण को अक्सर पश्चिमी प्रतिमानों के परिप्रेक्ष्य से देखा जाता है। हालाँकि, भारत की यात्रा अद्वितीय है, जिसमें वैश्विक प्रभावों को स्वदेशी दृष्टिकोणों के साथ मिलाया गया है।
जेयू के कुलगुरु प्रोफेसर अविनाश तिवारी ने कहा कि परंपरा और आधुनिकता परस्पर विपरीत प्रदर्शित होते हैं पर ये भिन्न होते हुए भी पृथक नहीं है। वे ‘एक-दूसरे के पूरक जरूर हैं और एक-दूसरे को पर्याप्त प्रभावित भी करते हैं। परंपरा जहॉं किसी समाज या देश को समृद्ध बनाती है, वहीं आधुनिकता उसे गतिशीलता प्रदान करती है। आधुनिकता हमें पर देती है, उडऩे को, तो परंपरा हमें जमीन से जोड़े रखती है। इस प्रकार परंपरा और आधुनिकता में सामंजस्य अतीत के गौरव को बनाए रखने के साथ-साथ समाज को उन्नति व समृद्धि की ओर अग्रसर करता है।
सेमिनार में जीवाजी विश्वविद्यालय के साथ-साथ इटली, बोलिविया, इंडोनेशिया, नेपाल आदि के ख्यातिलब्ध विश्वविद्यालय भी सहयोगी की भूमिका में रहे।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए।काश फाउंडेशन ने जेयू के संयुक्त तत्वावधान में घाटी गाँव क्षेत्र में नि: शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया । जिसमें सैकड़ों बुजुर्गों को नि: शुल्क दवा वितरित की गईं।कार्यक्रम का संचालन कृतिक्षा ने किया। वहीं प्रो. शांतिदेव सिसोदिया के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

